आंखें देखते ही पता चल जाती हैं ये 5 बीमारियां, कहीं आप भी तो नहीं हो गए इनके शिकार
हाई ब्लड प्रेशर के कारण आंखों में कई बदलाव हो सकते हैं, जिन्हें हाइपरटेंसिव रेटिनोपैथी कहा जाता है. इनमें आंखें धुंधली दिखाई पड़ना, आंखों में ब्लीडिंग और अंधापन आदि दिक्कतें शामिल हो सकती हैं. गंभीर मामलों में यह ऑप्टिक नर्व को भी नुकसान पहुंचा सकता है.
ग्लूकोमा से आंखों में होने वाले बदलावों में मुख्य रूप से ऑप्टिक नर्व को नुकसान होना शामिल है, जिससे आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कम हो सकती है. ग्लूकोमा बेहद गंभीर बीमारी है, जो जो ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचाती है. यही नर्व आंख से दिमाग तक जानकारी ले जाती है.
उम्र से संबंधित मैक्युलर डिजनरेशन एक ऐसी कंडीशन है, जो आंखों के पीछे प्रकाश संवेदनशील ऊतक रेटिना के केंद्र मैक्युला को नुकसान पहुंचाती है. इससे भी आंखें कमजोर होती है, जिससे पढ़ना, गाड़ी चलाना और चेहरे पहचानना मुश्किल हो सकता है.
डायबिटीज से आंखों में कई तरह के बदलाव हो सकते हैं, जिनमें धुंधला दिखाई देना, मोतियाबिंद, ग्लूकोमा और डायबिटिक रेटिनोपैथी शामिल हैं. समय के साथ डायबिटीज आपकी आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे आंखें कमजोर हो सकती है या अंधापन भी हो सकता है.
एनीमिया के कारण आंखों में कई बदलाव हो सकते हैं. इनमें आंखों का सफेद भाग पीला पड़ना, निचली पलकों का पीला पड़ना और आंखों के पीछे खून की धमनियों का फटना आदि शामिल है. इसके अलावा एनीमिया के कारण आंखों में जलन या दर्द हो सकता है.