Oldest Restaurants In India: आजादी से पहले के हैं ये रेस्तरां! आज भी इनके स्वाद के दीवाने हैं लोग, जानिए क्यों?
1876 में शुरू हुआ Indian Coffee House एक कैफे से कहीं ज्यादा एक कल्चरल पहचान बन गया. यहां लेखक, छात्र और विचारक घंटों बैठकर चर्चा करते रहे हैं. साधारण कटलेट, ऑमलेट और कॉफी के साथ यहां विचार भी पनपते रहे हैं.
1923 में स्थापित Britannia & Co. मुंबई के डॉक इलाके के पास आज भी अपनी पारसी पहचान के साथ कायम है. बेरी पुलाव और कैरामेल कस्टर्ड जैसे व्यंजन यहां की पहचान हैं. समय बदला, लेकिन इसकी रफ्तार और अंदाज वही रहा.
1911 में दार्जिलिंग में शुरू हुआ Glenary’s पहले एक छोटी बेकरी था. बाद में यह रेस्टोरेंट और टी रूम बना, जो आज भी उसी इमारत में चल रहा है. केक, पेस्ट्री और कॉन्टिनेंटल खाना यहां की खासियत है.
1913 से चला आ रहा Karim’s दिल्ली की जामा मस्जिद के पास मुगलई खाने की मजबूत पहचान है. निहारी, कोरमा और कबाब यहां बिना किसी बदलाव के उसी पुराने स्वाद में मिलते हैं. यहां खाना ट्रेंड के मुताबिक नहीं, परंपरा के मुताबिक चलता है.
1927 में शुरू हुआ Flurys कोलकाता की पार्क स्ट्रीट की शान माना जाता है. यूरोपियन बेकरी और पेस्ट्री कल्चर को भारत से जोड़ने वाला यह नाम आज भी क्वालिटी और सादगी के लिए जाना जाता है.
1953 में शुरू हुआ Paradise भारत में बिरयानी की पहचान बन चुका है. हैदराबादी बिरयानी का स्वाद यहां सालों से वैसा ही है, जैसा लोग याद रखते हैं. यही निरंतरता इसे भरोसेमंद बनाती है.
1924 में स्थापित MTR यानी मावली टिफिन रूम साउथ इंडियन खाने की सादगी और अनुशासन का उदाहरण है. रवा इडली से लेकर डोसा तक, यहां स्वाद में दिखावा नहीं, बल्कि प्रक्रिया की ईमानदारी दिखती है.
1913 से गोवा में चल रहा Cafe Tato आम लोगों के रोज़मर्रा के खाने का ठिकाना रहा है. पूरी, भाजी और बन्स जैसे साधारण लेकिन संतुलित खाने के लिए यह आज भी उतना ही भरोसेमंद है. यहां विरासत दिखाई नहीं जाती, बल्कि रोज निभाई जाती है.