ये 10 आदतें बताती है कि आप खुद को कम आंक रहे हैं, एक्सपर्ट्स ने बताएं Low Self-Respect के संकेत
साइकोलॉजिस्ट बताते हैं कि बिना गलती के सॉरी कहना या अपनी राय रखने पर अपराध बोध जैसा महसूस करना कम आत्म सम्मान का संकेत देता है. इसे लेकर साइकोलॉजिस्ट बताते हैं कि इसके लिए पहले खुद से पूछे कि क्या सच में मैंने किसी को नुकसान पहुंचाया है, अगर नहीं तो अपनी जगह पर कॉन्फिडेंस से खड़े रहे.
इसके अलावा साइकोलॉजिस्ट बताते हैं कि थका होने पर भी हर काम के लिए हां कहना या सिर्फ दूसरों की मंजूरी के लिए खुद को नजरअंदाज करना बताता है कि आपकी सीमाएं तय नहीं है. ऐसे में कभी-कभी ना कहना भी सेल्फ रिस्पेक्ट का हिस्सा होता है.
इसके अलावा दोस्तों या परिवार को आपको नीचा दिखाने देना या पार्टनर को हद पार करने देना यह दिखाता है कि आप उनके बुरे व्यवहार को स्वीकार करते हैं. इसे लेकर 2021 में बचपन में गलत व्यवहार का बड़ों के सेल्फ एस्टीम और इमोशनल रेगुलेशन पर असर नाम की एक स्टडी से पता चला है कि गलत व्यवहार को बर्दाश्त करने से नेगेटिव सेल्फ स्कीमा और मजबूत होता है ,जिससे एक फीडबैक लूप बनता है. जहां पीड़ित नाकाबिलियत को अंदर से महसूस करते हैं या इमोशनल डिश रेगुलेशन को बढ़ाता है. वहीं आप खुद के साथ जैसा व्यवहार करते हैं, वह दूसरों को सीखाता है कि आपको कैसा व्यवहार करना है. इसलिए जब आपकी बेइज्जती हो या कोई उंचे टाेन में बात करें तो उन्हें टोके और कहे मैं यह टोन स्वीकार नहीं करूंगा.
इसके अलावा एक्सपर्ट यह भी बताते हैं कि जो लोग खुद को लगातार बेवकूफ या फैलियर कहते हैं तो यह खूद के लिए सेल्फ हार्म होता है . इसे खुद के साथ अच्छा बार बर्ताव करके ठीक किया जा सकता है. साइकोलॉजिस्ट के अनुसार अगर आप गलतियां करते हैं तो अपने साथ वैसे ही नरमी से पेश आए जैसे आप किसी दोस्त के साथ आते हैं.
एक्सपर्ट बताते हैं अगर आप हर समय तारीफ या तसल्ली की उम्मीद करते हैं तो इससे पता चलता है कि आपके अंदर का भरोसा गायब है. जर्नल ऑफ पर्सनैलिटी में कंटिंजेंट सेल्फ-एस्टीम एंड लाइफ सैटिस्फैक्शन: द मीडिएटिंग रोल ऑफ ऑथेंटिसिटी नाम की 2018 की एक स्टडी से पता चलता है कि लगातार वैलिडेशन चाहने से इमोशनल उतार-चढ़ाव होता है, जिससे ऑथेंटिसिटी कम होने से पूरी सेहत खराब होती है. ऐसे में इसे खुद पर भरोसा रखकर ठीक करें.
पर्सनल बाउंड्री को नजरअंदाज करना भी कम सेल्फ रिस्पेक्ट का संकेत होता है. दरअसल ज्यादा कमिटमेंट करना, दूसरों के लिए खाना छोड़ना इन सबसे पता चलता है कि आप अपनी प्रायोरिटी की लिस्ट में सबसे आखिर में आते हैं. वहीं जिन लोगों की बाउंड्री ठीक नहीं होती है वो जल्दी बर्नआउट हो जाते हैं. ऐसे में जरूरी होता है कि आप खुद का और अपने समय का सम्मान करें.
टॉक्सिक रिलेशनशिप में रहना भी कम सेल्फ रिस्पेक्ट का संकेत है. एक्सपर्ट्स के अनुसार बस इस उम्मीद में कि चीजें बेहतर हो जाएंगी, दुख देने वाली बातों से भागते रहना दिखाता है कि आपकी सेल्फ रिस्पेक्ट कम है और आप अकेलेपन से डरते हैं. इससे निकलने के लिए अपनी नॉन-नेगोशिएबल्स की लिस्ट बनाकर इसे ठीक करने की कोशिश करें.
इसके अलावा एक्सपर्ट्स बताते हैं कि तरक्की के मौके टालना या अपने ही लक्ष्यों को नुकसान पहुंचाना इस डर से जुड़ा हो सकता है कि आप सफलता के लायक नहीं हैं. ऐसे में अपने गोल को छोटे-छोटे अचीव करने लायक कामों में बांटकर ठीक करें. वहीं अपनी प्रोग्रेस को सबके सामने सेलिब्रेट करें.
दूसरों से ज्यादा तुलना करना भी कम सेल्फ रिस्पेक्ट को दर्शाता है. सोशल मीडिया पर दूसरों की जिंदगी से खुद की तुलना करना सेल्फ कॉन्फिडेंस को कम करता है. 2020 की एक स्टडी द इफेक्ट ऑफ सोशल कम्पेरिजन ओरिएंटेशन ऑन साइकोलॉजिकल वेल-बीइंग से पता चलता है कि सोशल लाइफ की तुलना करने से इमोशनल परेशानी के रास्तों से सेल्फ-वर्थ कम हो जाती है.
सेल्फ-केयर को नजरअंदाज करना भी कम सेल्फ रिस्पेक्ट को दर्शाता है. नींद, व्यायाम और खुशी जैसी बुनियादी जरूरतों को टाल देना दिखाता है कि आप खुद को जरूरी नहीं मान रहे है. खुद की देखभाल को प्राथमिकता बनाना आत्म-सम्मान की शुरुआत मानी जाती है.