King Of Thailand: थाईलैंड के राजाओं को क्यों कहा जाता है राम, जानें क्या है इस उपाधि के पीछे की वजह
हिंदू धर्म में भगवान राम विष्णु के सातवें अवतार और एक आदर्श राजा के रूप में पूजे जाते हैं. चक्री वंश के थाई राजाओं ने यह टाइटल भगवान की ताकत, धर्म और इस पुरानी मान्यता को दिखाने के लिए अपनाया था कि राजा आध्यात्मिक रूप से भगवान विष्णु से जुड़े होते हैं.
थाईलैंड की कल्चरल पहचान भारतीय महाकाव्य रामायण से बहुत ज्यादा प्रेरित है. थाईलैंड में रामायण को रामकियन के नाम से पहचाना जाता है. यह महाकाव्य थाईलैंड की कला, साहित्य और शाही रस्मों को आकार देता है.
इस परंपरा को राजा बुद्ध योद्फा चुललोके ने शुरू किया था. इन्हें राम I के नाम से जाना जाता था. ये 1782 में चक्री राजवंश के संस्थापक थे. उन्होंने रामाथिबोडी टाइटल को अपनाया. इसके बाद हर राजा ने इस परंपरा को जारी रखा.
थाईलैंड की पुरानी राजधानी का नाम अयुत्या रखा गया था. यह भारत में भगवान राम की जन्म भूमि अयोध्या से प्रेरित था. अयोध्या से यह सिंबॉलिक कनेक्शन भारत और साउथ ईस्ट एशिया के बीच सदियों से चले आ रहे कल्चरल लेन देन को दर्शाता है.
थाई मान्यता में राजा को धरती पर भगवान का प्रतिनिधि माना जाता है. इसी के साथ थाई मान्यता के अनुसार राजा में भगवान विष्णु के गुण होते हैं. राम टाइटल राजा के स्पिरिचुअल कद को काफी मजबूत करता है.
20वीं सदी में राजा वजीरावुध ने इंग्लिश नंबरिंग सिस्टम शुरू किया. जैसे राम I, राम V, राम III वगैरह. इसके बाद वेस्टर्न देशों के साथ कम्युनिकेशन और भी आसान हो गया. अब विदेशियों के लिए हर राजा को पहचानना और याद रखना आसान हो गया था.