Moon Disappearance: अगर अचानक से गायब हो जाए चांद तो क्या होता, क्या इसके बिना जिंदा रह पाएगी हमारी धरती?

Moon Disappearance: चांद रात के आसमान में एक शांत साथी जैसा दिखाई दे सकता है लेकिन यह पृथ्वी को स्थिर रखने में एक बड़ी भूमिका निभाता है. समुद्र के लहरों को कंट्रोल करने से लेकर मौसम को रेगुलेट करने और यहां तक कि हमारे दिन की लंबाई के लिए भी चांद एक कॉस्मिक स्टेबलाइजर की तरह काम करता है. आइए जानते हैं कि अगर अचानक से चांद गायब हो जाए तो उसका असर हमारी धरती पर कैसे पड़ेगा और क्या इसके बिना जिंदा रह पाएगा यह ग्रह.
पृथ्वी पर समुद्र की ज्यादातर लहरों के लिए चांद की ग्रेविटी जिम्मेदार होती है. अगर यह गायब हो जाए तो ज्वार भाटा की गतिविधि लगभग 60% से 70% कम हो जाएगी. इससे सिर्फ सूरज की वजह से होने वाली कमजोरी सौर लहरें ही बचेंगी. इसके बाद समुद्री इकोसिस्टम, तटीय मछली पालन और प्राकृतिक पोषक तत्वों के चक्र बुरी तरह से प्रभावित होंगे.
चांद ग्रेविटेशनल फ्रिक्शन के जरिए पृथ्वी के घूमने की गति को धीमा करता है. इस ब्रेकिंग इफेक्ट के बिना पृथ्वी तेजी से घूमने लगेगी. समय के साथ पूरा एक दिन 6 से 12 घंटे का हो सकता है. इस वजह से सभी जीवों के सोने का चक्र, बायोलॉजिकल घड़ी और रोजमर्रा की जिंदगी में काफी ज्यादा बदलाव आ जाएंगे.
तेजी से घूमती हुई पृथ्वी की वजह से वायुमंडल काफी ज्यादा हिंसक व्यवहार करेगा. वैज्ञानिकों का ऐसा अनुमान है कि हवा की गति 400 से 500 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंच सकती है. इससे लगातार बड़े तूफान आएंगे और कई इलाके लगभग रहने लायक नहीं रहेंगे.
चांद पृथ्वी के अक्षीय झुकाव को लगभग 23.5 डिग्री पर स्थिर रखने में मदद करता है. इससे हमें अनुमानित ऋतु में मिलती हैं. इसके बिना पृथ्वी बेतरतीब ढंग से डगमगाएगी. कुछ जगहों पर लाखों सालों तक काफी ज्यादा गर्मी पड़ सकती है जबकि कुछ लंबे हिमयुग में जा सकते हैं.
चांद सूरज की रोशनी को रिफ्लेक्ट करता है और रात में प्राकृतिक रोशनी देता है. इसके बिना रातें काफी ज्यादा अंधेरी हो जाएंगी. जिस वजह से रात में घूमने वाले जानवर प्रभावित होंगे.
इन सभी प्रभावों की वजह से बड़े पैमाने पर जीव जंतु खत्म हो जाएंगे. हालांकि पृथ्वी खुद तो मौजूद रहेगी लेकिन जैसा जीवन हम जानते हैं वह गंभीर खतरे में होगा.