Restaurant Hygiene: रेस्टोरेंट में मकड़ी का जाला मिला तो कितना जुर्माना, क्या है FSSAI का नियम?

Restaurant Hygiene: किसी भी रेस्टोरेंट में मकड़ी का जाला दिखना शायद एक छोटी सी बात लगे, लेकिन भारतीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत इसे काफी गंभीरता से लिया जाता है. भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के नियमों के मुताबिक मकड़ी के जालों की मौजूदगी को अनहाइजीनिक माना जाता है. आइए जानते हैं कि इसके लिए रेस्टोरेंट ऑनर को क्या सजा मिल सकती है.
खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत रेस्टोरेंट में मकड़ी के जालों को छोटी-मोटी समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. इन्हें अस्वच्छ स्थिति की श्रेणी में रखा जाता है. इसका मतलब है कि वह रेस्टोरेंट खाद्य सुरक्षा के लिए जरूरी स्वच्छता के उचित मानकों को बनाए रखने में नाकाम रहा है.
अधिनियम की धारा 56 में साफ तौर पर कहा गया है कि अगर खाना साफ माहौल में नहीं बनाया गया और गंदगी, कीड़े मकोड़े या फिर मकड़ी के जालों वाली जगह पर बनाया या फिर परोसा जाता है तो खाद्य व्यवसाय संचालक पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
अगर अधिकारियों को सफाई से जुड़ी कोई भी गंभीर समस्या मिलती है तो खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुधार का नोटिस जारी कर सकता है. इससे रेस्टोरेंट को समस्या ठीक करने के लिए कुछ समय मिल जाता है. हालांकि अगर मलिक तय समय सीमा के अंदर नियमों का पालन नहीं करता तो उसका लाइसेंस रद्द या फिर निलंबित किया जा सकता है. इतना ही नहीं बल्कि मलिक को और भी सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है.
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के शेड्यूल 4 के दिशा निर्देशों के मुताबिक रेस्टोरेंट के लिए हर समय कीड़े मकोड़े से मुक्त माहौल बनाए रखना जरूरी है. इसमें दीवारों, छत और सामान रखने की जगह की नियमित सफाई शामिल है.
रेस्टोरेंट के लिए सफाई बनाए रखना कोई ऑप्शन नहीं बल्कि एक कानूनी दायित्व है. मकड़ी के जाले जैसी छोटी से छोटी चीज भी लापरवाही का संकेत देती है. इससे रसोई और खाना परोसने वाली जगह पर अपनाई जा रही खाद्य सुरक्षा की पूरी प्रक्रिया पर ही सवाल उठ सकता है.
इसकी शिकायत करने के लिए फूड सेफ्टी कनेक्ट पोर्टल या फिर एप्लीकेशन के जरिए और खाद्य सुरक्षा अधिकारी से संपर्क किया जा सकता है.