सड़कों की कोडिंग क्या है और यह कैसे करती है काम, इससे कैसे आसान हो जाता है सफर?

देश के ग्रामीण इलाकों की तस्वीर बदलने वाली है, वहां के सफर को और ज्यादा सुलभ बनाने के लिए सरकार बेहद आधुनिक और अनूठा कदम उठाने जा रही है. केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय ने देश के हर गांव की सड़क को एक अनूठी और डिजिटल पहचान देने का फैसला किया है. इस नई व्यवस्था के जरिए सड़कों की कोडिंग की जाएगी, इससे न सिर्फ गांव के अंदर जाना आसान हो जाएगा बल्कि सड़कों के निर्माण और उनकी मरम्मत के काम में भी बदलाव आएगा. आइए जानें यह क्या है और कैसे काम करेगा.
सवाल है कि सड़कों की कोडिंग क्या है? अब सरल शब्दों में कहें तो सड़कों की कोडिंग का मतलब देश की हर छोटी-बड़ी सड़क और गली को एक खास नाम और नंबर दिया जाता है. यह एक डिजिटल पहचान होती है, जिसके तहत हर सड़क को एक विशिष्ट अल्फान्यूमेरिक कोड आवंटित किया जाता है.
इस अनोखे कोड की मदद से देश की सभी गांव की सड़कों को डिजिटली मैप किया जा सकेगा. इस सिस्टम के लागू होने से ग्रामीण परिसर के बुनियादी ढांचे के नियोजन, प्रशासन और आपातकालीन सेवाओं की आपूर्ति में एक बड़ा और सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा.
सड़कों की कोडिंग का यह पूरा सिस्टम एक खास फॉर्मुले पर आधारित होता है. इसमें हर सड़क को जो कोड दिया जाता है, वह उसकी पूरी लोकेशन की जानकारी समेटे होता है. मान लीजिए किसी गांव की सड़क का कोड VR-MH-TN-BHW-001 रखा गया है.
इस कोड में शामिल शुरुआती अक्षर और अंक यह बताते हैं कि यह सड़क किस राज्य, किस जिले, किस ब्लॉक और किस गांव के अंतर्गत आती है. यह कोड उस सड़क के लिए किसी आधार कार्ड या रोल नंबर की तरह से काम करता है, जिससे उसकी पहचान बेहद आसान हो जाती है.
इस व्यवस्था को और भी ज्यादा असरदार और जनता के लिए अनुकूल बनाने के लिए एक नया तरीका अपनाया जा रहा है. अब ग्रामीण सड़कों की शुरुआत में जो साइनबोर्ड या मील के पत्थर लगाए जाते हैं, उन पर एक स्पेशल क्यूआर कोड लिखा जाएगा.
इस क्यूआर कोड को सरकारी भू-स्थानिक प्लेटफॉर्म जैसे कि ग्राम मानचित्र से सीधे लिंक किया जाएगा. इसके बाद कोई भी राहगीर या स्थानीय नागरिक अपने स्मार्टफोन की मदद से उस क्यूआर कोड को स्कैन करके उस सड़क से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी आसानी से ले सकता है.
रोड कोडिंग का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इससे सरकारी कामकाज में पारदर्शिता आ जाएगी और ठेकेदारों की जवाबदेही तय होगी. जब कोई नागरिक सड़क पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करेगा तो उसे तुरंत पता चल जाएगा कि इस सड़क को बनाने में कितना खर्चा लगा, ठेकेदार कौन था, निर्माण की तारीख क्या थी और यह काम किस सरकारी अधिकारी की देखरेख में हुआ.
इस पूरी पारदर्शिता की वजह से घटिया सड़क बनाने वाले ठेकेदारों और भ्रष्टाचार पर पूरी तरह से लगाम लगाई जा सकेगी. अक्सर यह भी देखा जाता है कि गांव के अंदरूनी रास्तों, गलियों या टोलों का सही रास्ता न पता होने की वजह से लोग वहां पहुंच नहीं पाते हैं.
सड़कों की कोडिंग होने से यह समस्या हमेशा के लिए दूर हो जाएगी. अब ऑनलाइन डिलीवरी करने वाले लोग, डाक सेवाएं, एंबुलेंस या फायर ब्रिगेड की गाड़ियां आपातकालीन स्थिति में बिना किसी भटकाव के सीधे मौके पर पहुं सकेंगी.
इस सटीक नेविगेश सिस्टम की वजह से मेडिकल इमरजेंसी के दौरान मरीजों की जान सही समय पर बचाई जा सकेगी.