चांदनी रात में ही सिंचाई करने को क्यों कहते हैं बुजुर्ग, इसका फसल पर क्या पड़ता है असर?

भारत खेती किसानी के मामले में दुनिया के अव्वल देशों की सूची में शामिल है. भारत में किसानी का तरीका आज भी आधुनिक कम और पारंपरिक ज्यादा है. खेती में आज भी बड़े बुजुर्गों द्वारा बताए गए तरीके ज्यादा इस्तेमाल होते हैं. कुछ लोग इन्हें अंधविश्वास मानते हैं तो वहीं कुछ इनमें लॉजिक भी ढूंढ लेते हैं.
ऐसी ही एक बात है चांदनी रात यानी पूर्णिमा के आसपास के दिनों में फसलों की सिंचाई करना. बड़े-बुजुर्ग हमेशा कहते हैं कि इस समय पानी देने से फसल दोगुनी तेजी से बढ़ती है. देखा जाए तो इसके पीछे कोई जादू नहीं बल्कि पूरी तरह साइंस काम करता है.
जैसे समुद्र में पूर्णिमा के दिन ऊंची-ऊंची लहरें उठती हैं जिसे हम ज्वार-भाटा या टाइड्स कहते हैं, ठीक वैसा ही असर धरती के पानी और पौधों के भीतर मौजूद लिक्विड पर भी पड़ता है. चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण इस समय सबसे ज्यादा मजबूत होता है.
जब किसान चांदनी रात में खेत में पानी लगाते हैं. तो चंद्रमा की ग्रैविटी के कारण पौधों की जड़ें जमीन से पानी और जरूरी न्यूट्रिएंट्स को बहुत आसानी से ऊपर की तरफ खींच लेती हैं. इससे पौधों के भीतर वाटर सर्कुलेशन बहुत फास्ट हो जाता है. यही वजह है कि इस समय सिंचाई करने से खाद-पानी का असर सीधे दिखता है.
इसके अलावा चांदनी रात की ठंडी रोशनी का पौधों के मेटाबॉलिज्म पर बहुत पॉजिटिव असर पड़ता है. सूरज की तेज धूप में पानी देने से जहां इवैपोरेशन यानी पानी भाप बनकर उड़ने का डर रहता है. वहीं रात के शांत और ठंडे माहौल में दिया गया पानी सीधे पौधों की जड़ों में समाकर उन्हें अंदर से मजबूती देता है.
आयुर्वेद और कृषि विज्ञान में भी माना गया है कि चंद्रमा की किरणों में एक खास तरह की ऊर्जा और शीतलता होती है. जिसे सोम तत्व कहा जाता है. यह रोशनी पौधों में क्लोरोफिल बनाने और फोटोसिंथेसिस की प्रोसेस को रात में भी ज्यादा सपोर्ट करती है. जिससे फसलों की पत्तियों में ज्यादा चमक आ जाती है.
अगर प्रैक्टिकल तौर पर देखें तो चांदनी रात में सिंचाई करने से फसलों के फलों और दानों में मिठास और रस की मात्रा बढ़ जाती है. जो किसान इस पारंपरिक तरीके को आज भी अपना रहे हैं. वह इस बात को जानते हैं कि इससे अनाज की क्वालिटी और चमक दोनों सुधरती हैं. जिससे बाजार में फसल के बहुत अच्छे दाम मिलते हैं.