Unconquered Indian Forts: भारत के वो किले जिन्हें कभी नहीं जीत पाए अंग्रेज, जानकर होगा गर्व

Unconquered Indian Forts: भारतीय इतिहास का हर अध्याय विदेशी जीत के साथ खत्म नहीं होता. ब्रिटिश मिलिट्री पावर के चरम पर कुछ किले ऐसे भी थे जिन्हें ताकत से जीतना नामुमकिन साबित हुआ. शानदार आर्किटेक्चर, राजनीतिक जगहों और स्थानीय विरोध की वजह से ये किले अजेय ही रहे. आइए जानते हैं उन किलों के बारे में.
लोहागढ़ किले ने अपना यह खिताब ईमानदारी से कमाया है. इस किले की दीवारों पर ब्रिटिश तोप के गोले दागे गए लेकिन इस किले का कुछ नहीं बिगड़ा. ब्रिटिश जनरल लॉर्ड लेक ने 1805 में इस पर पांच बार हमला किया और हर बार नाकाम रहा.
अरब सागर में एक चट्टान पर बना मुरुद जंजीरा किला चारों तरफ से पानी से घिरा है. ब्रिटिश, पुर्तगाली, डच और मराठों ने इसे जीतने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहे. खास बात यह है कि यह किला 1947 में भारत की आजादी तक आजाद ही रहा.
ज्यादातर किलों के उलट जूनागढ़ एक समतल जमीन पर बना था. लेकिन इसके बावजूद भी दुश्मन कभी इसके दरवाजे नहीं तोड़ पाए. इसकी बड़ी दीवारों और कई लेयर वाले सुरक्षा ने सीधे अंदर जाना लगभग नामुमकिन बना दिया था. कई हमले करने के बावजूद भी ब्रिटिश इसे मिलिट्री तौर पर कभी जीत नहीं पाए.
कुंभलगढ़ की 36 किलोमीटर लंबी दीवार दुनिया की सबसे लंबी दीवारों में से एक है. इसकी ऊंचाई, संकरी एंट्री पॉइंट और मजबूत सुरक्षा ने हमलावरों को हमेशा बाहर ही रखा.
मेहरानगढ़ किले को कभी लड़ाई में नहीं जीता गया. इसकी खड़ी चट्टानें, विशाल दीवारें और छिपें हुए दरवाजे हमलों को जानलेवा बनाते थे. क्योंकि ब्रिटिश इसे ताकत से नहीं जीत पाए इस वजह से उन्होंने एक संधी पर साइन किया.
थार रेगिस्तान के बीच जैसलमेर किला भूगोल और मजबूत स्थानीय गठबंधनों से सुरक्षित था. किले से ज्यादा शहर जैसा यह किला व्यापार मार्गों को कंट्रोल करता था और ब्रिटिश हाथों से हमेशा बाहर ही रहा. आज भी लोग इसकी दीवारों के अंदर रहते हैं.