गुरुग्राम के नीचे दफन है यह नदी, इसे सुखाकर बसाया गया था यह शहर
गुरुग्राम हरियाणा का वह शहर जो आज गगनचुंबी इमारतों, चमचमाती सड़कों और वैश्विक कंपनियों का गढ़ है. लेकिन कभी इस जगह पर साहिबी नदी बहा करती थी.
साहिबी नदी जो कभी इस क्षेत्र की जीवनरेखा थी आज इतिहास के पन्नों में खो चुकी है. यह एक बरसाती नदी थी जो जयपुर के जीतगढ़ से निकलकर अलवर, हरियाणा और दिल्ली के रास्ते यमुना नदी में मिलती थी.
इस नदी का पानी नजफगढ़ झील और नाले के माध्यम से यमुना तक पहुंचता था. लेकिन आज इस नदी का अस्तित्व लगभग खत्म हो चुका है.
साहिबी नदी पूरी तरह बारिश पर निर्भर थी. 1980 के दशक तक इस नदी में पानी बहता था. दिल्ली-जयपुर हाईवे पर इसके बहाव को नियंत्रित करने के लिए मसानी बैराज बनाया गया था.
लेकिन बदलते समय के साथ बारिश की कमी के कारण ये नदी सूखती चली गई. इसके अलावा शहरीकरण और अतिक्रमण ने इस नदी को सूखा दिया.
अलवर से गुरुग्राम तक नदी के रास्ते पर बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य हुए. नदी की जमीन पर प्लॉट काटे गए और ऊंची-ऊंची इमारतें खड़ी कर दी गईं.
आज गुरुग्राम में बारिश का मौसम आते ही सड़कें नदियों में बदल जाती हैं. चमचमाता शहर नदी की जमीन पर बसे होने के चलते बारिश में तालाब बना जाता है जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा.