कागज का नोट गलता क्यों नहीं, कैसे होती है इसकी मेकिंग?

Polymer Notes India: भारत में जल्द ही ₹10 और ₹20 के प्लास्टिक नोट देखने को मिलेंगे. रिजर्व बैंक पॉलीमर नोट छापने की तैयारी कर रहा है. लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि कागज के बने नोट धुलने के बाद भी आसानी से गलते क्यों नहीं है? दरअसल इन्हें बनाने की प्रक्रिया काफी ज्यादा एडवांस होती है. आइए जानते हैं इस बारे में पूरी जानकारी.
नोटबुक या फिर अखबार के उलट आरबीआई द्वारा जारी नोट लकड़ी की लुगदी के बजाय 100% कॉटन फाइबर से बनाया जाता है. कॉटन फाइबर प्राकृतिक रूप से ज्यादा मजबूत होते हैं और पानी के संपर्क में आने पर भी खराब नहीं होते. इस वजह से नोट सालों तक रोजाना इस्तेमाल के बावजूद भी ठीक रहता है.
नोट को बनाने की प्रक्रिया के दौरान कॉटन पेपर पर जिलेटिन और रेजिन के खास मिश्रण की कोटिंग की जाती है. इस सुरक्षा परत से फाइबर के बीच मजबूत बॉन्डिंग बनती है. इससे नोट नमी, पसीने, गंदगी, बार-बार मोड़ने और गलती से पानी का संपर्क में आने पर भी खराब नहीं होते.
बनाने की प्रक्रिया कॉटन फाइबर को साफ करने और केमिकल ट्रीटमेंट देकर गाढ़ी लुगदी बनाने से शुरू होती है. इस लुगदी को बड़ी शीट में दबाया जाता है और पूरी तरह से सूखने से पहले कागज में वॉटर मार्क और सुरक्षा धागे जैसे फीचर्स जोड़ दिए जाते हैं.
हर नोट में कई इन-बिल्ट सुरक्षा तत्व होते हैं. इनमें महात्मा गांधी वॉटरमार्क, आरबीआई और भारत लिखे हुए मैटेलिक सुरक्षा धागे, ऑप्टिकली वेरिएबल इंक और माइक्रो प्रिंटिंग शामिल हैं. इन फीचर्स की मदद से नकली नोट और असली नोट के बीच आसानी से पहचान होती है.
नोटों की छपाई हाई प्रिसिजन इंटैग्लियो प्रिंटिंग से की जाती है. इससे उभरे हुए पैटर्न बनते हैं जिन्हें छूकर महसूस किया जा सकता है. कुछ खास मूल्य के नोटों पर रंग बदलने वाली स्याही का भी इस्तेमाल किया जाता है. इन्हें अलग-अलग तरफ से देखने पर हरे से नीले रंग में बदलाव नजर आता है.
नोट के किनारों पर उभरी हुई लाइन, सिंबल और कुछ आकार छापे जाते हैं ताकि जो लोग देख नहीं सकते वे भी अलग-अलग मूल्य वर्ग के नोटों की पहचान कर सकें.
हर बैंक नोट पर एक यूनिक सीरियल नंबर होता है जिसे फ्लोरोसेंट इंक से छापा जाता है. ये सीरियल नंबर अल्ट्रावॉयलेट लाइट में चमकते हैं. जिससे बैंक और सुरक्षा एजेंसी के लिए करेंसी की असलियत की जांच करना और नकली नोट का पता लगाना आसान हो जाता है.
छपाई के बाद बैंक नोट की बड़ी शीट को कंप्यूटर से चलने वाली मशीनों का इस्तेमाल करके अलग-अलग नोट में काटा जाता है. छपाई में कमी, खराब सुरक्षा फीचर या फिर अलाइनमेंट की गलती का पता लगाने के लिए हर नोट की ऑटोमेटेड जांच की जाती है. सिर्फ उन्हीं नोट को बंडल किया जाता है जो क्वालिटी की सभी जांच में पास हो जाते हैं. इसके बाद उन्हें सरकुलेशन के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के करेंसी चेस्ट में भेजा जाता है.