अफीम, गांजा, चरस और भांग... सबसे ज्यादा किसमें होता है नशा, कौन सी चीज कैसे बनती है?
नशे का नाम उठते ही सबसे पहले गांजा, चरस, अफीम और भांग जैसे शब्द सामने आते हैं. दिखने में एक जैसे लगने वाले यह सभी नशे वास्तव में अलग तरीके से तैयार किए जाते हैं और शरीर पर इनका असर भी अलग होता है.
भारत में इनके उपयोग और उत्पादन को लेकर कानून काफी सख्त हैं, फिर भी इनके बारे में लोगों में आधी-अधूरी जानकारी रहती है. इसी भ्रम को दूर करने के लिए जरूरी है कि इनके बनने के तरीके, असर और नुकसान को सरल शब्दों में समझा जाए.
अफीम पोस्त के पौधे से निकलने वाला एक सख्त, चिपचिपा रस होता है. जब पौधे की फलियों पर कट लगाई जाती है, तो उससे निकलने वाला सफेद दूध जैसा लिक्विड हवा लगते ही भूरा हो जाता है. यही सूखा हुआ पदार्थ अफीम कहलाता है. इसमें मॉर्फिन और कोडीन जैसे अत्यधिक नशीले तत्व होते हैं.
अफीम का असर बहुत तेज होता है और यह शरीर की नसों को सुन्न कर देती है. नशा लंबा चलता है और एडिक्शन होने की संभावना बेहद ज्यादा होती है.
गांजा भांग के पौधे की पत्तियों और फूलों को सुखाकर मिलता है. इसमें THC (Tetrahydrocannabinol) नाम का रसायन होता है, जो दिमाग पर सीधे असर डालता है. गांजे का नशा मध्यम स्तर का माना जाता है. यह मूड, सोच और टाइम-सेंस को प्रभावित करता है, लेकिन ओपियम जितना खतरनाक नहीं माना जाता है.
चरस भी भांग के पौधे से ही बनती है, लेकिन इसकी प्रक्रिया अलग होती है. ताजे पौधे के फूलों को हाथ से रगड़कर एक काला, चिकना रेजिन निकाला जाता है. यही चरस है, यह गांजे से काफी ज्यादा नशीली होती है. चरस का असर तेज और गहरा होता है. कम मात्रा में भी इसके नशे का प्रभाव लंबा चलता है.
भांग पौधे की पत्तियों को सुखाकर और पीसकर बनाई जाती है. भारत में होली जैसे त्योहारों पर इसका सेवन आम है. कानून इसे सीमित मात्रा में अनुमति देता है. भांग का नशा सबसे हल्का होता है. यह शरीर को रिलैक्स करता है लेकिन अधिक सेवन नुकसानदायक होता है.