Monsoon Break: किसी राज्य में कैसे अटक जाता है मॉनसून, क्या इसे रास्ता देने का भी है कोई तरीका?

Monsoon Break: दक्षिण पश्चिम मानसून को अक्सर भारत की आर्थिक जीवन रेखा कहा जाता है. लेकिन इसका आगे बढ़ना हमेशा आसान नहीं होता. दरअसल हाल के मौसम के आंकड़ों से पता चला है कि महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में मानसून अटक चुका है. इस वजह से पूरे देश में सामान्य से कम बारिश हुई है. लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर मानसून के रुकने के पीछे क्या वजह है और क्या इंसान इसे आगे बढ़ाने के लिए कुछ कर सकते हैं? आइए जानते हैं इन सवालों के जवाब.
मानसून तब आगे बढ़ता है जब बंगाल की खाड़ी या फिर अरब सागर के ऊपर कम दबाव वाले क्षेत्र या फिर साइक्लोनिक सर्कुलेशन बनते हैं. ये प्रणाली नमी वाली हवाओं को जमीन की तरफ खींचती हैं और मानसून को आगे बढ़ने में मदद करती हैं. जब इस तरह की मौसम प्रणाली नहीं बन पाती तब मानसून की रफ्तार धीमी हो जाती है और वह किसी क्षेत्र में दिनों या फिर हफ्तों तक रुक सकता है.
उत्तर पश्चिमी भारत से चलने वाली गर्म और सूखी हवाएं अक्सर आगे बढ़ती मानसून हवाओं के लिए रुकावट का काम करती हैं. हीट वेव, वेस्टर्न डिस्टरबेंस और सूखी महाद्वीपीय हवाएं नमी वाली हवाओं की रफ्तार को कम या फिर तेज कर सकती हैं. इससे बारिश नए इलाकों तक पहुंच नहीं पाती.
प्रशांत महासागर में अल नीनो घटना दुनिया के मौसम पैटर्न को काफी ज्यादा प्रभावित करती है. अल नीनो चरण के दौरान वायुमंडलीय परिसंचरण में इस तरह बदलाव होता है कि अक्सर भारतीय मानसून कमजोर हो जाता है.
मैडन जूलियन ऑसिलेशन भूमध्य रेखा के आसपास बादल, बारिश और हवाओं की बड़े पैमाने पर होने वाली हलचल है. जब यह अनुकूल चरण में होता है तो भारत में बादल बनने और बारिश की रफ्तार बढ़ जाती है. जब यह दूर हो जाता है तो मानसून की रफ्तार कमजोर हो जाती है और बारिश में भी कमी आ सकती है.
मानसून की बारिश तब होती है जब नमी वाली हवाएं आपस में मिलती हैं और वायुमंडल में ऊपर उठती हैं. अगर नीचे की हवाएं बिना मिले सीधी और एक समान दिशा में बहने लगे तो नमी जमा नहीं हो पाएगी. यही वजह है कि बदल कम बनेंगे और बारिश की रफ्तार कमजोर या फिर स्थिर हो जाएगी.
तकनीकी तरक्की के बावजूद भी अभी ऐसा कोई तरीका नहीं है जिससे मानसून का रास्ता बदला जा सके या फिर उसे किसी खास राज्य की तरफ मोड़ा जा सके. क्लाउड सीडिंग से सिर्फ सीमित इलाकों में मौजूद नमी वाले बादलों से बारिश बढ़ाई जा सकती है.