व्हिस्की के साथ बीयर मिलाने पर क्या होता है, क्या डबल हो जाता है नशा?
वैज्ञानिकों और हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, नशा इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आपने क्या मिक्स किया, बल्कि इस पर कि आपने कुल कितना अल्कोहल (एथेनॉल) शरीर में डाला. साइंस बिल्कुल साफ है कि ड्रिंक का फ्लेवर बदल सकता है, टेस्ट बदल सकता है, लेकिन शरीर सिर्फ कुल एथेनॉल की मात्रा ही एब्जॉर्ब करता है.
चाहे आप बीयर को व्हिस्की में मिलाकर पी लें या अलग-अलग घूंटों में, असर वही होता है जो उस पैग में मौजूद कुल अल्कोहल तय करता है. शराब की हर किस्म में अलग-अलग मात्रा में अल्कोहल होता है. इसी मात्रा को ABV Alcohol by Volume कहा जाता है. यानी किसी ड्रिंक में कितने प्रतिशत अल्कोहल मौजूद है.
उदाहरण के तौर पर सामान्य बीयर में 5% से 12% तक ABV होता है. वाइन का ABV 8% से 15% के बीच रहता है. व्हिस्की में 40% से 50% तक अल्कोहल होता है. भारत में आमतौर पर 42.8% ABV वाली व्हिस्की मिलती है.
रम, वोडका, जिन, टकीला और ब्रांडी में भी लगभग 35% से 50% तक अल्कोहल मौजूद होता है. वहीं, देसी शराब में 20%-40% तक अल्कोहल पाया जाता है, जो स्थान और तरीके के हिसाब से काफी बदल सकता है.
अब मान लीजिए आपने एक ग्लास बीयर पी जिसमें 5% अल्कोहल था, और फिर एक शॉट व्हिस्की पी जिसमें 42.8% अल्कोहल था. शरीर दोनों को मिक्स करके नहीं देखता, न ही यह मायने रखता है कि आपने किस क्रम में पीया. आपके शरीर ने कुल एथेनॉल लिया, बस वही नशे की तीव्रता तय करेगा.
लोगों को अक्सर मिक्स करने से ज्यादा चढ़ गई का एहसास इसलिए होता है क्योंकि, फ्लेवर बदल जाता है, जिससे पीने की स्पीड बढ़ जाती है. अलग-अलग ड्रिंक का टेस्ट हल्का-भारी होता है, जिससे मात्रा ज्यादा हो जाती है. दिमाग में पहले से बैठी गलतफहमी, जिसे placebo effect कहा जाता है, असर बढ़ा चढ़ाकर महसूस करवाता है.
वाइन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि मिक्स करने में कोई समस्या नहीं, समस्या है सिर्फ कितना पी लिया इस बात की. अगर आपने बीयर के बाद हाई-ABV वाली ड्रिंक ली, तो कुल अल्कोहल ज्यादा हो गया और नशा तेज महसूस होगा, लेकिन इसका कारण मिक्सिंग नहीं, मात्रा है.