History Of Tea: कैसे हुई थी चाय की उत्पत्ति, इस अनोखी कहानी को सुनकर नहीं होगा यकीन
कहानी प्राचीन चीन में शेन नुंग से शुरू होती है. लगभग 2737 ईसा पूर्व उन्होंने विद्वान शासक के रूप में राज किया. वे स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य में काफी ज्यादा विश्वास रखते थे. बीमारियों से बचने के लिए वह पीने से पहले पानी को उबालते थे.
एक दिन जब सम्राट शेन नुंग अपने बगीचे में पानी उबल रहे थे तो हवा के एक झोंके से पास की एक जंगली झाड़ी से कुछ पत्तियां बर्तन में गिर गई. सम्राट ने देखा कि पानी का रंग और खुशबू बदल चुकी है. उन्होंने पानी को फेंकने के बजाय उसे चखा. चखने के बाद उन्हें ताजगी और ऊर्जा महसूस हुई.
उबलते पानी में गिरी पत्तियां कैमेलिया साइनेंसिस पौधे की थी. इसी पौधे से आज सभी तरह की चाय बनाई जाती हैं.
अपनी शुरुआती दिनों में चाय कोई आम पेय नहीं थी. प्राचीन चीन में इसे एक औषधि काढ़े के रूप में पिया जाता था. ऐसा माना जाता था कि यह पाचन में सुधार करता है, शरीर को डिटॉक्सिफाई करता है और मानसिक स्पष्टता बढ़ाता है.
भारत में बोधिधर्म से जुड़ी एक और कहानी मौजूद है. बोधिधर्म 6वीं शताब्दी के एक बौद्ध भिक्षु थे. ऐसा माना जाता है कि वह लंबे ध्यान के दौरान जागते रहने के लिए चाय की पत्तियां चबाते थे. ऐसा करने से उनका ध्यान केंद्रित रहता था. बस यहीं से चाय एक ऐसी ड्रिंक के रूप में पहचानी जाने लगी जो दिमाग को तेज करती है.
चाय का ग्लोबल सफल 1830 के दशक में तेज हुआ. इस समय में अंग्रेजों ने असम में चाय के देसी पौधे खोज और भारत में बड़े पैमाने पर उनकी खेती शुरू की. आखिरकार वक्त के साथ-साथ यह दुनिया में सबसे ज्यादा पी जाने वाली ड्रिंक में से एक बन गई.