दुनिया में क्रिसमस मनाने के 5 अलग-अलग अंदाज, जो इस त्योहार को बनाते हैं खास

दुनिया भर में 25 दिसंबर को क्रिसमस डे मनाया जाता है. लेकिन क्रिसमस सिर्फ क्रिसमस ट्री, सांता क्लाॅज या गिफ्ट्स तक सीमित नहीं है. दुनिया के अलग-अलग देशों में यह त्योहार अपने कल्चर, स्टोरी और परंपराओं के साथ मनाया जाता है. कई देशों में इस दिन बच्चों के लिए गिफ्ट लिए जाते हैं तो कई बुराई को जलाकर नई शुरुआत की जाती है. वहीं यह अनोखी परंपराएं बताती है कि किसी भी त्योहार को मनाने के तरीके अलग-अलग होते हैं लेकिन खुशी हर जगह एक जैसी होती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको कई देशों के क्रिसमस मनाने के पांच अलग-अलग अंदाज बताएंगे जो इसे और खास बनाते हैं.
आइसलैंड में क्रिसमस लोक कथाओं और ट्रेडीशन से जुड़ा हुआ है. यहां यूल लैंड्स नाम के शरारती भाई क्रिसमस से पहले एक-एक कर बच्चों से मिलने आते हैं. वहीं बच्चे खिड़की पर जूते रखते हैं, जिनमें यह छोटे-छोटे गिफ्ट्स छोड़ते हैं. इसके बाद फैमिली साथ बैठकर डिनर करती है और क्रिसमस सेलिब्रेट करती है. यूल कैट की स्टोरी भी यहां खास मानी जाती है जो नए कपड़े पहनने की परंपरा से जुड़ी हुई है.
इसके अलावा जापान में क्रिसमस एक मॉडर्न और खुशनुमा अंदाज में मनाया जाता है. यहां शहर रंगीन लाइट से जगमगा उठते हैं और क्रिसमस ईव को खासतौर पर रोमांटिक माना जाता है. यहां क्रिसमस पर केएफसी खाने की परंपरा बहुत फेमस है, जिसके लिए लोग पहले से आर्डर देते हैं. इसके साथ क्रीम और स्ट्रॉबेरी से सजा क्रिसमस केक भी यहां खास होता है.
वहीं इंडोनेशिया में क्रिसमस स्थानीय परंपराओं के साथ मनाया जाता है. नॉर्थ सुमात्रा में बताक समुदाय मारबिंडा परंपरा निभाते हैं, जिसमें बलि देकर सामूहिक डिनर किया जाता है. बाली में घरों के बाहर पेजर बांस की सजावट होती है और लोग नेगजोत के तहत घर का बना खाना एक दूसरे को देते हैं. जकार्ता में रोबो-रोबो परंपरा के तहत म्यूजिक और पड़ोसियों के साथ सेलिब्रेशन किया जाता है.
ग्वाटेमाला में क्रिसमस से पहले ला क्वेमा डेल डियाब्लो यानी शैतान जलाने की परंपरा निभाई जाती है. 7 दिसंबर को यहां लोग अपने घर साफ करते हैं और शैतान के पुतले के साथ पुराना सामान जलाते हैं, ताकि नेगेटिविटी दूर हो और अच्छी किस्मत आए. इसके अलावा सड़कों पर अलाव, म्यूजिक और कई तरीके के आयोजन इस दिन को और खास बनाते हैं.
ग्रीस में क्रिसमस समुद्री परंपराओं से जुड़ा हुआ है. यहां रंग-बिरंगी लकड़ी की नावों को रोशनी से सजाया जाता है, जिन्हें कारावाकी कहा जाता है. यहां क्रिसमस ईव पर बच्चे घर-घर जाकर कालांडा नाम के पारंपरिक कैरोल गाते हैं. घरों में शहद से बनी मेलोमाकारोना कुकीज और क्रिस्टोप्सोमो ब्रेड बनाई जाती है, जिससे क्रिसमस का माहौल और भी खास हो जाता है.