अमरनाथ यात्रा के रास्ते पर विमान-ड्रोन बैन, जानें देश में कहां-कहां है नो-फ्लाइंग जोन और न मानने पर क्या होता है?

अमरनाथ यात्रा शुरू हो चुकी है और बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का पहला जत्था रवाना हो गया है. पहलगाम हमले के बाद अमरनाथ यात्रा इस बार और ज्यादा कड़ी सुरक्षा में की जा रही है. इस रूट को और ज्यादा सुरक्षित बनाते हुए जम्मू कश्मीर सरकार ने पूरे रास्ते को नो फ्लाइंग जोन घोषित कर दिया है. हालांकि नो फ्लाइंग जोन का यह कोई पहला मामला नहीं है. चलिए जानें कि देश में और कौन की जगहों को नो फ्लाइंग जोन घोषित किया जा चुका है.
पहलगाम हमले के बाद अमरनाथ यात्रा को बहुत सेंसेटिव माना जा रहा है. इसीलिए इसके रूट पर नो फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है. इसके अलावा देश में कई और संस्थान और भवन हैं जिनके ऊपर से या आसपास विमानों, हेलीकॉप्टर या फिर ड्रोन के उड़ान भरने की मनाही है.
दरअसल किसी भी जगह को नो फ्लाइंग जोन घोषित करने का उद्देश्य उसकी सुरक्षा और वहां के लोगों की सुरक्षा को सुनिश्चित करना होता है.
ऐसे में कुछ ऐतिहासिक और जरूरी इमारतों को सरकार ने नो-फ्लाइंग जोन घोषित कर रखा है, जहां ड्रोन आदि उड़ाने की बिल्कुल इजाजत नहीं है.
देश में राष्ट्रपति भवन, आंध्र प्रदेश का तिरुमला वेंकटेश्वर मंदिर, संसद भवन, ताजमहल, स्वर्णं मंदिर, प्रधानमंत्री आवास को नो फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है.
इसके अलावा भारतीय वायुसेना का केंद्र, एटॉमिक रिसर्च सेंटर मुंंबई, मथुरा रिफाइनरी, श्रीहरिकोटा स्पेस स्टेशन, पद्मनाभस्वामी मंदिर, द टावर ऑफ साइलेंस को भी नो फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है.
अब सवाल होता है कि अगर कोई इस नियम को मानने के मना कर दे तो क्या होता है. दरअसल नियम टूटने पर सबसे पहले एयर ट्रैफिक कंट्रोल या सैन्य रडार के जरिए विमान से संपर्क किया जाता है.
इसके बाद उसको चेतावनी दी जाती है कि वो वहां से हट जाए. अगर तब भी नियम नहीं माना गया तो सुरक्षा में चूक मानते हुए उसे लैंडिंग के लिए मजबूर करते हैं या फिर मार गिराने का आदेश होता है.