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NEET-JEE-UPSC या UGC NET, कौन-सा एग्जाम सबसे कठिन? ऐसे समझें पूरी तस्वीर

कविता गाडरी   |  18 Sep 2026 09:25 AM (IST)
NEET-JEE-UPSC या UGC NET, कौन-सा एग्जाम सबसे कठिन? ऐसे समझें पूरी तस्वीर

हर साल लाखों छात्र देश के सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं. किसी का टारगेट मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लेना होता है, तो कोई आईआईटी पहुंचाना चाहता है. वहीं कुछ उम्मीदवार सिविल सेवा में जाने या एकेडमिक क्षेत्र में करियर बनाने के लिए परीक्षा देते हैं. ऐसे में कई बार सवाल उठता है कि नीट,  जेईई, यूपीएससी या यूजीसी नेट में से आखिर सबसे कठिन परीक्षा कौन सी है. दरअसल इसका जवाब सिर्फ परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों की संख्या से तय नहीं किया जा सकता. इन सभी परीक्षाओं की योग्यता, परीक्षा प्रक्रिया और क्वालीफाई करने का मतलब अलग-अलग है. हालांकि आंकड़े यह जरूर बताते हैं कि हर चरण पर उम्मीदवारों की संख्या किस तरह कम होती जाती हैं.

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नीट यूजी 2026 में करीब 22,79,743 उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जबकि 19,99,895 उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए. इनमें से 11,21,185  उम्मीदवार क्वालीफाई हुए. लेकिन नीट क्वालीफाई करना अपने आप में एमबीबीएस सीट मिलने के गारंटी नहीं है.

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एनएमसी के मौजूदा डेटाबेस में करीब 1.39 लाख एमबीबीएस सीटें हैं. इस हिसाब से परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों और उपलब्ध एमबीबीएस सीटों के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है. एडमिशन कैटेगरी, स्टेट कोटा, ऑल इंडिया कोटा, कॉलेज की पसंद और काउंसलिंग जैसे पहलुओं पर भी निर्भर करता है.

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जेईई मेन 2026 में 16,04,854 यूनिक उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया और 15,38,468 परीक्षा में शामिल हुए. इनमें से 2,50,182 उम्मीदवार जेईई एडवांस्ड के लिए एलिजिबल हुए यानी परीक्षा में शामिल उम्मीदवारों में करीब 16.3 फीसदी ही अगले चरण तक पहुंच सके.

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इसके बाद जेईई एडवांस 2026 में 1,87,389 उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन किया और 1,79,694 परीक्षा में शामिल हुए. इनमें से 56,880 उम्मीदवार क्वालीफाई हुए. हालांकि जेईई एडवांस्ड क्वालीफाई करने के बाद भी आईआईटी में सीट मिलना तय नहीं होता. रैंक, कैटेगरी, पसंदीदा प्रोग्राम और उपलब्ध सीटों के आधार पर आगे एडमिशन होता है.

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वहीं यूपीएससी सिविल सर्विसेज एग्जामिनेशन का चयन फाइनल आंकड़ों के हिसाब से काफी संकरा नजर आता है. 2025 के चक्र में 9,37,876 उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया था और 5,76,793 उम्मीदवारों ने प्रीलिम्स परीक्षा दी. इनमें से केवल 13,343 उम्मीदवारों को मेन्स के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया. आखिर में 958 उम्मीदवारों की सिफारिश की गई. इस तरह शुरुआती स्तर से अंतिम चयन तक उम्मीदवारों की संख्या में बहुत बड़ी कमी आती है.

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इसके बाद यूजीसी नेट जून 2026 में 7,73,806 उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया और 6,07,151 उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए. 84 विषयों के रिजल्ट में कुल 1,47,579 उम्मीदवार तीन अलग-अलग पात्रता कैटेगरी में क्वालीफाई हुए. परीक्षा में शामिल उम्मीदवारों के आधार पर कुल क्वालिफिकेशन रेट करीब 24.3 फीसदी रहा. यहां भी सभी उम्मीदवारों के लिए क्वालीफाई करने का मतलब एक जैसा नहीं है, क्योंकि उम्मीदवार अलग-अलग पात्रता कैटेगरी को टारगेट करते हैं.

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इन आंकड़ों से साफ होता है कि चारों परीक्षाओं में कठिन स्तर का स्वरूप अलग-अलग है. नीट में बड़ी संख्या में उम्मीदवार सीमित मेडिकल सीटों के लिए कंपटीशन करते हैं. जेईई मेन के उम्मीदवारों पहले जेईई मेन और फिर जेईई एडवांस्ड के चरण से गुजरना पड़ता है. यूपीएससी में बहुत चयनात्मक चरणों के बाद सीमित संख्या में उम्मीदवार अंतिम सूची तक पहुंचते हैं. वहीं यूजीसी नेट में रिजल्ट उम्मीदवार की टारगेट एलिजिबल कैटेगरी पर निर्भर करता है.

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ऐसे में अगर शुरुआती चयन चरण में उम्मीदवारों के अनुपात को आधार माना जाए, तो यूपीएससी सीएसई का फाइनल बहुत संकरा दिखाई देता है. 2025 में आवेदन करने वालों में करीब 1.63 फीसदी उम्मीदवार ही मेंस के लिए शॉर्टलिस्ट हुए थे.  ऐसे में किसी एक परीक्षा को केवल उम्मीदवारों की संख्या पर सबसे कठिन कहना सही नहीं है, क्योंकि असली चुनौती यह समझने में है कि कितने उम्मीदवार परीक्षा में उतरते हैं. हर चरण में कितने आगे बढ़ते हैं और लास्ट में कितनों को मौका मिलता है.

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