Chanakya Niti: अच्छा लीडर है गरुड़ के समान, जानें क्या है चाणक्य की इस बात का मतलब
गुणैरुत्तमतां याति नोच्चैरासनसंस्थिताः ।प्रासादशिखरस्थोऽपि काकः किं गरुडायते ॥ - इस श्लोक में चाणक्य ने गुणी व्यक्ति को गरुड़ के समान बताया है. गुणी और अच्छे इंसानों का कद उनके कार्यों और व्यवहार से नजर आता है न कि दिखावा करने से.
चाणक्य कहते हैं कि एक अच्छा लीडर, एक आम व्यक्ति भी अपनी खूबियों से महानता प्राप्त करता है, न कि ऊंचे पद पर कब्जा हासिल करने से. जैसे भवन की छत पर बैठने से कौआ गरुड़ नहीं हो जाता. उसी प्रकार ऊंचे स्थान पर विराजमान और धनवान होने से व्यक्ति महान नहीं बनता.
बुद्धिमान, गुणी और समझदार व्यक्ति अपने गुणों का बखान नहीं किया करते. ये वो हीरा हैं जिसकी चमक कोयले की खदान में दूर से भी दिख जाती है. वहीं जो बड़ी-बड़ी बेमतलब की बातें और खुद की प्रशंसा करते हैं वह दूसरों की नजरों में खुद को गिराते हैं. पुराणों में गुरुड़ को समझदार और बुद्धिमान होने के साथ-साथ तेज गति से उड़ना वाला पक्षी बताया है.
चाणक्य कहते हैं कि जिस प्रकार पूर्णिमा के चांद के स्थान पर दूज या चौथ का छोटा चांद पूजा जाता है, उसी प्रकार सद्गुणों से युक्त इंसान निर्धन एवं नीच कुल से संबंधित होते हुए पूजनीय होता है.
चाणक्य नीति कहती है कि एक सुंदर फूल मात्र नयन सुख देता है लेकिन एक सुगंधित फूल कई लोगों को प्रसन्न करता है, उनका तनाव दूर कर देता है. उसी प्रकार अच्छे और गुणी इंसान की गुणवत्ता सभी दिशाओं में फैलती है, उसे दिखावे की जरुरत नहीं.