रबी की फसल में नहीं लगेंगे कीड़े, बुवाई से पहले इन बातों का रखें ख्याल

रबी सीजन में कर लें ये काम
सबसे पहली और सबसे जरूरी बात यह है कि खेत की गहरी जुताई होना बहुत जरूरी है. जब आप ट्रैक्टर से खेत की अच्छी तरह जुताई करवाते हैं, तो मिट्टी ऊपर-नीचे होती है और पिछली फसल के बचे हुए अवशेष और छिपे हुए कीड़ों के अंडे तेज धूप में आ जाते हैं. सूरज की तेज धूप उन छिपकर बैठे खतरनाक कीटों और फंगस के बीजाणुओं को पल भर में खत्म कर देती है. इसलिए जुताई के बाद खेत को दो-तीन दिन खुला खुला छोड़ना एकदम फायदेमंद साबित होता है.
जुताई के बाद अगली बारी आती है खेत की मिट्टी को एकदम ताकतवर और सेहतमंद बनाने की. आजकल मार्केट में मिलने वाले यूरिया और डीएपी के भरोसे ही मत बैठिए बल्कि खेत में भरपूर मात्रा में पुरानी और सड़ी हुई गोबर की खाद या फिर वर्मीकंपोस्ट जरूर मिलाएं. जैविक खाद डालने से मिट्टी के अंदर मौजूद केंचुए और मित्र बैक्टीरिया एक्टिव हो जाते हैं जो फसल की जड़ों को मजबूत बनाते हैं.
बीज बोने से पहले सबसे बड़ा खेल बीज के उपचार यानी सीड ट्रीटमेंट का होता है. बिना उपचार किए बीज खेत में डालना सही नहीं है. कृषि जानकारों की मानें तो फंगस और दीमक से फसल को बचाने के लिए फफूंदनाशक और बायो-एजेंट से बीजों को पक्का उपचारित कर लेना चाहिए. यह पूरी फसल को शुरुआती दौर में लगने वाली भयानक बीमारियों से ढाल की तरह बचाता है और जर्मिनेशन भी सही होता है.
इसके अलावा मिट्टी की सेहत का हाल जानने के लिए सॉइल हेल्थ कार्ड की मदद लेना बिल्कुल न भूलें. हर खेत की मिट्टी की तासीर अलग होती है, इसलिए अंदाजे से खाद डालने की बजाय टेस्ट रिपोर्ट के हिसाब से ही माइक्रोन्यूट्रिएंट्स और जिंक का इस्तेमाल करें. अगर मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी पूरी रहेगी. तो पौधे में प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता बनी रहती है.
खरपतवार यानी घास-फूस की समस्या भी कीड़ों और बीमारियों को न्योता देती है. बुवाई से पहले खेत की निराई-गुड़ाई करके सारे पुराने खरपतवार और कचरे को पूरी तरह साफ कर लें. कई बार ये अनचाहे पौधे ही कीटों और लार्वा का घर होते हैं जो मौका मिलते ही मुख्य फसल पर हमला बोल देते हैं. खेत एकदम साफ-सुथरा रहेगा तो हवा और धूप पौधों को बराबर मिलेगी और कीड़ों के छिपने की एक भी जगह नहीं बचेगी.
बीज की वैरायटी चुनते समय भी आपको थोड़ी समझदारी दिखानी होगी. हमेशा अपने इलाके की जलवायु और मिट्टी के हिसाब से प्रमाणित और रोग-प्रतिरोधी किस्मों का ही चयन करें. लोकल या बिना नाम के बीज सस्ते के चक्कर में बिल्कुल न खरीदें क्योंकि उनमें बीमारियां झेलने की ताकत बिल्कुल नहीं होती. अगर बीज ही हाइब्रिड और दमदार होगा तो आधी परेशानी तो आपकी बुवाई के समय ही खत्म हो जाएगी
सिंचाई के प्रबंधन का हिसाब भी बुवाई से पहले ही तय कर लेना चाहिए. खेत में पानी भरने की समस्या नहीं होनी चाहिए क्योंकि जलभराव से जड़ों में गलन और फंगस की बीमारी तेजी से फैलती है. ड्रिप या सही तरीके से हल्की सिंचाई का इंतजाम रखें ताकि नमी भी बनी रहे और कीड़ों को पनपने का मौका भी न मिले. स्मार्ट किसान वही है जो समस्या आने से पहले ही उसका पक्का तोड़ निकाल कर रखता है.
आखिरी और सबसे काम की बात यह है कि फसल चक्र का नियम जरूर अपनाएं. अगर पिछले साल एक ही खेत में लगातार वही फसल बोई थी, तो इस बार उसकी जगह बदल दें. लगातार एक ही फसल उगाने से मिट्टी की ताकत खत्म होती है और वही पुराने कीड़े दोबारा लौटकर आ जाते हैं. फसल बदलकर खेती करने से चक्र टूट जाता है और आपकी गोभी, गेहूं या सरसों की फसल पूरी तरह सुरक्षित रहकर बंपर मुनाफा देती है.