हीटवेव के दौरान पशुओं को कितनी बार पानी पिलाना चाहिए, क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

गर्मियों के मौसम में जब पारा आसमान छूने लगता है, तो इंसान ही नहीं बल्कि हमारे बेजुबान पशु भी हीटवेव यानी लू की चपेट में आ जाते हैं. इस भीषण गर्मी में पशुओं की देखभाल करना बेहद जरूरी हो जाता है. क्योंकि जरा सी लापरवाही उनके स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर बहुत बुरा असर डाल सकती है.
पशुपालन विशेषज्ञों की मानें तो हीटवेव के दौरान पशुओं को चौबीसों घंटे साफ और ठंडे पानी की सुविधा मिलनी चाहिए. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस मौसम में पशुओं को दिनभर में कम से कम चार से पांच बार पानी जरूर पिलाना चाहिए. जिससे उनके शरीर का तापमान नॉर्मल बना रहे और वे डिहाइड्रेशन से बचे रहें.
पशुओं को पानी पिलाते समय पानी के तापमान का ध्यान रखना भी बहुत जरूरी है. तेज धूप में रखे टैंक या पाइप का गर्म पानी पशुओं को बिल्कुल न पिलाएं. हमेशा छायादार जगह पर रखे बर्तनों या हैंडपंप का ताजा और ठंडा पानी ही उन्हें दें जिससे उनके शरीर को तुरंत राहत मिल सके.
गर्मी के इस टॉर्चर से बचाने के लिए पशुओं के बांधने वाले स्थान यानी शेड का हवादार होना बहुत आवश्यक है. उनके रहने की जगह पर सीधे धूप नहीं आनी चाहिए. आप चाहें तो शेड की छत पर पुआल डाल सकते हैं या बोरे को गीला करके लटका सकते हैं. जिससे वहां का माहौल ठंडा बना रहे.
भीषण गर्मी के दिनों में पशुओं के खान-पान के समय में थोड़ा बदलाव करना स्मार्ट चॉइस होगी. एक्सपर्ट्स के अनुसार दोपहर की तेज धूप और गर्मी के समय पशुओं को भारी भोजन या चारा देने से बचना चाहिए. उन्हें सुबह-सुबह या फिर शाम को ठंडे वक्त ही चारा खिलाना सबसे सही रहता है.
इस मौसम में दुधारू पशुओं के शरीर में पोषक तत्वों की कमी न हो इसके लिए उनके चारे में हरा चारा और मिनरल मिक्सचर जरूर शामिल करें. हरा चारा पशुओं के शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है. जबकि मिनरल मिक्सचर उनकी इम्यूनिटी को मजबूत रखकर उन्हें बीमारियों से बचाता है.
अगर आपको लगे कि कोई पशु सुस्त हो गया है उसकी सांसें तेज चल रही हैं या उसके मुंह से झाग निकल रहा है. तो यह हीट स्ट्रोक के लक्षण हो सकते हैं. ऐसे में तुरंत पशु के शरीर पर ठंडा पानी छिड़कें और बिना देर किए नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करें.