होंठों को खूबसूरत बनाने वाली लिपस्टिक में होता है नॉनवेज? जानें फैक्ट्री से मेकअप किट तक का सफर

दुनिया भर में शायद ही कोई ऐसी महिला होगी जिसके मेकअप बॉक्स में लिपस्टिक शामिल न हो. ऑफिस जाना हो, किसी शादी-पार्टी में शामिल होना हो या फिर कोई साधारण सा फंक्शन हो, बिना लिपस्टिक के हर महिला का पूरा लुक अधूरा सा लगता है. आज के समय में कॉस्मेटिक मार्केट में तरह-तरह के लुभावने शेड्स और वैरायटी मौजूद हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके होंठों की खूबसूरती को बढ़ाने वाली इस लिपस्टिक को लेकर अक्सर सोशल मीडिया पर एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया जाता है? इंटरनेट पर कई बार यह बात उठती है कि लिपस्टिक को बनाने में मछली के तेल का इस्तेमाल किया जाता है.
इस बात को लेकर अक्सर महिलाओं के मन में संशय रहता है कि क्या वे अनजाने में अपने होंठों पर नॉनवेज प्रोडक्ट लगा रही हैं. लेकिन सच यह है कि हर तरह की लिपस्टिक में मछली का तेल मौजूद हो, ऐसा बिल्कुल नहीं है.
एक सामान्य लिपस्टिक को तैयार करने के लिए मुख्य रूप से वैक्स यानी मोम, अलग-अलग तरह के ऑयल, पिगमेंट यानी रंग और कुछ चुनिंदा रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि, कुछ खास तरह की लिपस्टिक के शेड्स और ब्रांड्स ऐसे जरूर हैं जिनमें मछली से जुड़े तत्वों की मिलावट की जाती है, लेकिन यह नियम सभी लिपस्टिकों पर पूरी तरह लागू नहीं होता.
अक्सर बाजार में मिलने वाली कुछ खास लिपस्टिक में एक अलग तरह की चमक या पर्ल जैसा इफेक्ट दिखाई देता है.एक रिपोर्ट के अनुसार, जो लिपस्टिक ज्यादा चमकदार (shimmery या pearlescent) होती हैं, उनमें 'गुआनीन' (Guanine) नामक एक विशेष पदार्थ मिलाया जाता है. यह अनोखा पदार्थ हेरिंग जैसी खास मछलियों की ऊपरी परत यानी उनके स्केल्स से तैयार किया जाता है.
यही गुआनीन आपके होंठों को एक खूबसूरत सी चमक और मोती जैसा प्रभाव देता है. आपको जानकर हैरानी होगी कि इस पदार्थ का इस्तेमाल केवल लिपस्टिक में ही नहीं, बल्कि नेल पॉलिश और आईशैडो में भी खूब होता है.
लिपस्टिक को होंठों पर लगाने के बाद जो नमी और मुलायम एहसास होता है, उसके पीछे भी एक बड़ा राज छुपा हुआ है. लिपस्टिक में मॉइस्चर और चिकनापन बनाए रखने के लिए 'स्क्वेलीन' (Squalene) का उपयोग किया जाता है.
यह स्क्वेलीन मूल रूप से शार्क मछली के लिवर के तेल से निकाला जाता है. हालांकि, बदलते दौर के साथ अब कई आधुनिक और नामी कंपनियों ने इसका विकल्प ढूंढ लिया है. आजकल की बड़ी ब्रांड्स शार्क के तेल की जगह जैतून जैसी प्राकृतिक चीजों से मिलने वाले प्लांट-बेस्ड या सिंथेटिक स्क्वेलीन का इस्तेमाल करने लगी हैं.
जबकि पुरानी और बेहद सस्ती लिपस्टिकों में अब भी पारंपरिक तौर पर मछली के तेल का प्रयोग देखा जाता है. अब बात करते हैं कि आखिर फैक्ट्री के भीतर एक आम लिपस्टिक को आकार देने के लिए किन बुनियादी चीजों को आपस में मिलाया जाता है.
लिपस्टिक को एक ठोस और बढ़िया शेप देने के लिए कैंडेलिला वैक्स, कार्नौबा वैक्स या सामान्य मोम का इस्तेमाल मुख्य आधार के रूप में होता है. इसके बाद उसे होंठों पर आसानी से फिसलने लायक चिकना और मुलायम बनाने के लिए कास्टर ऑयल, जोजोबा ऑयल, नारियल का तेल, जैतून का तेल और कोको बटर जैसी बेहतरीन चीजों को शामिल किया जाता है.
इन सबके अलावा लिपस्टिक में मनचाहा रंग भरने के लिए अलग-अलग तरह के पिगमेंट्स और मनमोहक खुशबू का इस्तेमाल होता है. फैक्ट्री के भीतर लिपस्टिक बनाने की शुरुआत सबसे पहले पिगमेंट्स फिक्सिंग की प्रक्रिया के साथ की जाती है. ये पिगमेंट्स एक प्रकार के विशेष रंग होते हैं, जिन्हें आपस में बेहद सटीक मात्रा में मिक्स करके दुनिया भर के आकर्षक कलर्स और नए-नए शेड्स तैयार किए जाते हैं.
जब एक बार परफेक्ट रंग का कॉम्बिनेशन तैयार हो जाता है, तो इसके बाद इसे तेल के साथ बहुत अच्छी तरह मिलाया जाता है. इस पूरी मिक्सिंग प्रक्रिया के दौरान इस बात का कड़ाई से ध्यान रखा जाता है कि तेल और पिगमेंट का आपसी अनुपात हमेशा 2:1 के हिसाब से ही फिक्स रहे.
रंग और तेल के इस गाढ़े मिश्रण को तैयार करने के बाद अगली महत्वपूर्ण स्टेज आती है, जिसे मॉल्डिंग कहा जाता है. इस प्रक्रिया के तहत पूरे मिक्सचर को एक तय और बेहद सटीक तापमान पर गर्म करके अच्छे से पकाया जाता है. इसके तुरंत बाद इस गर्म लिक्विड को बिना समय गंवाए बहुत तेजी के साथ ठंडा होने के लिए रख दिया जाता है.
इस पूरी कूलिंग प्रोसेस के दौरान इंजीनियर्स को इस बात का सबसे ज्यादा ख्याल रखना पड़ता है कि इस गाढ़े लिक्विड मिक्स के अंदर कहीं भी हवा के बुलबुले या एयर न आने पाए. जब यह पूरा मिक्सचर सांचे के भीतर पूरी तरह से जमकर ठंडा और ठोस हो जाता है, तो इसके बाद इस तैयार प्रोडक्ट को बहुत ही सावधानी के साथ सांचों से बाहर निकाला जाता है. बाहर निकलते ही ये खूबसूरत लिपस्टिक स्टिक्स के रूप में हमारे सामने आ जाती हैं.