पूरी दुनिया को जिस इतिहास के रचे जाने की उम्मीद सितंबर माह में ही थी वो थोड़ी देर से ही सही लेकिन पूरा हुआ. ऋषि सुनक ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बन गए हैं. वो पहले  ब्रिटिश-भारतीय प्रधानमंत्री हैं. ऋषि सुनक के प्रधानमंत्री बनने के बाद एक बार फिर चर्चा हो रही है कि वो कैसे ब्रिटेन और भारत के रिश्तों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.


दिल भारत में बसता है


ऐसे कई मौके आए जब सुनक की 'भारतीयता' झलकी है और उन्होंने जाहिर किया है कि उनका दिल भारत में बसता है. उत्तरी लंदन में कंजर्वेटिव फ्रेंड्स ऑफ इंडिया (सीएफआईएन) डायस्पोरा संगठन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भी ऐसा ही देखने को मिला था. वहां ऋषि सुनक ने अपने संबोधन की शुरुआत- "नमस्ते, सलाम, केम छो और किड्डा" जैसे पारंपरिक अभिवादन के शब्दों को चुनकर किय़ा. यहां तक कि उन्होंने अपने भाषण में हिन्दी में कहा था कि 'आप सब मेरे परिवार हो.'


सीएफआईएन की सह-अध्यक्ष रीना रेंजर के भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय संबंधों के बारे में एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा था, "हम जानते हैं कि यूके-भारत संबंध महत्वपूर्ण हैं. हम दोनों देशों के बीच अच्छे संबंध की वकालत करते हैं. हम सभी यूके के लोगों के लिए भारत में चीजें बेचने और काम करने के अवसर के बारे में बहुत जागरूक हैं.''


उन्होंने आगे कहा था,'' मैं यह सुनिश्चित करना चाहता हूं कि हमारे छात्रों के लिए भी भारत की यात्रा करना और वहां जाकर सीखना आसान हो, हमारी कंपनियों और भारतीय कंपनियों के लिए एक साथ काम करना भी आसान हो क्योंकि यह केवल एकतरफा संबंध नहीं है, यह दो-तरफ़ा संबंध है. इस तरह का बदलाव मैं दोनों देशों के रिश्ते में लाना चाहता हूं. ”


एक धर्मनिष्ठ हिंदू के रूप में, ऋषि सनक मंदिर में नियमित रूप से जाते हैं. उनकी बेटियां, अनुष्का और कृष्णा भी भारतीय संस्कृति में पूरी तरह परिचित है.


ऋषि सुनक का दिल भारत बसता है


 42 वर्षीय ऋषि सुनक ने इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति की बेटी अक्षता मूर्ति से शादी की है. सुनक के पिता यशवीर सुनक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा के सामान्य चिकित्सक थे और उनकी मां ऊषा सुनक, एक केमिस्ट की दुकान चलाती थीं. बचपन में ऋषि सुनक दुकान में मां की सहायता के लिए उनका हाथ बंटाते थे.


ऋषि सुनक की पढ़ाई  विनचेस्टर कॉलेज, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में हुई है. अपने माता-पिता के बारे में सुनक ने बताया था कि"मैंने अपने माता-पिता को पूरे समर्पण के साथ लोगों की सेवा करते हुए देखा है और उनकी छत्रछाया में ही मैं बड़ा हुआ हूं. सुनक को फिट रहना पसंद है, इसलिए वे अपने खाली समय में  क्रिकेट-फ़ुटबॉल खेलाना और उन्हें फिल्में देखना भी पसंद है." 


चीन के प्रति ऋषि सुनक का रुख काफी सख्त 
जहां भारत के प्रति उनका रुख नर्म है तो वहीं चीन के प्रति ऋषि सुनक का रुख काफी सख्त रहा है. उन्होंने कई मौकों पर कहा है कि चीन की आक्रमकता के खिलाफ बचाव में ब्रिटेन को बहुत मजबूत होने की जरूरत है.  उन्होंने कहा कि चीन और चाइनीज कम्यूनिस्ट पार्टी हमारी आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़े खतरे हैं जिसका सामना इस देश ने लंबे समय से किया है और हमें इसके लिए जीवित रहने की आवश्यकता है.''


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