पाकिस्तान सरकार ने रावलपिंडी जिले में धारा 144 लागू करने की घोषणा कर दी. यह कदम तब उठाया गया जब पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सेहत और उनकी मौजूदगी को लेकर अफवाहें तेज हो गईं. प्रशासन को आशंका थी कि देशभर में उनकी पार्टी PTI बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन कर सकती है. इसी को देखते हुए 1 से 3 दिसंबर तक हर प्रकार की भीड़ और सभा पर रोक लगा दी गई है.

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जिले के उपायुक्त डॉ. हसन वकार चीमा द्वारा जारी आदेशों में स्पष्ट कहा गया है कि इन तीन दिनों में किसी भी रूप में भीड़ जमा नहीं हो सकेगी. प्रशासन ने यह भी साफ कर दिया कि हथियार लाना, स्टिक या किसी भी तरह की ज्वलनशील सामग्री लेकर घूमना, पुलिस बैरिकेड हटाने की कोशिश करना और तेज़ आवाज़ में स्पीकर चलाना पूरी तरह बंद रहेगा. यहां तक कि मोटरसाइकिल पर दो लोगों के बैठने पर भी रोक है. सरकार का कहना है कि उन्हें ऐसी गोपनीय इनपुट मिले हैं, जिनसे हिंसा और अव्यवस्था के संकेत मिल रहे हैं.

PTI की शिकायत

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इमरान खान पिछले साल अगस्त से अडियाला जेल में बंद हैं. उनकी पार्टी का आरोप है कि उन्हें एक महीने से अधिक समय से न अपने नेता को देखने दिया गया है, न उनसे कोई सत्यापित बात कराई जा रही है. PTI नेताओं का दावा है कि सरकार उनकी हालत छुपा रही है और इसी वजह से पार्टी बड़े पैमाने पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की तैयारी कर रही थी, लेकिन प्रशासन ने किसी भी तरह की रैली या सभा पर पहले ही रोक लगाकर हालात को नियंत्रित करने की कोशिश की है.

इमरान खान के बेटे का बयान

कासिम खान, जो विदेश में रह रहे हैं, ने रॉयटर्स से बात करते हुए गहरी चिंता जताई. उनका कहना था कि महीनों से पिता से न कोई संपर्क हो पाया है और न ही परिवार को उनकी किसी तरह की विश्वसनीय जानकारी मिली है. कासिम के अनुसार यह स्थिति परिवार के लिए मानसिक यातना जैसी बन गई है. उन्होंने आरोप लगाया कि जेल प्रशासन उच्च अदालत के आदेशों के बावजूद मुलाकात की अनुमति नहीं दे रहा और उन्हें डर है कि स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है.

क्यों डर रहा है प्रशासन? खुफिया रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

जिले की खुफिया समिति की रिपोर्ट में संकेत दिए गए हैं कि कुछ समूह विरोध प्रदर्शनों को सेना से जुड़े संवेदनशील ठिकानों तक ले जाने की कोशिश कर सकते हैं. इस चेतावनी के बाद सरकार ने स्पष्ट किया है कि धारा 144 किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने और सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखने के लिए आवश्यक है. हाल के राजनीतिक हालातों को देखते हुए प्रशासन कोई जोखिम उठाना नहीं चाहता.

एक दिग्गज कप्तान से जेल की कोठरी तक का सफर

क्रिकेट विश्व कप 1992 में पाकिस्तान को चैंपियन बनाने वाले इमरान खान बाद में प्रधानमंत्री बने और 2018 से 2022 तक सत्ता में रहे. उनके खिलाफ कई मामले पिछले साल से चल रहे हैं, जिनमें उन्हें सजा भी सुनाई गई. खान का कहना है कि सारे मामले राजनीतिक बदले की कार्रवाई है, लेकिन अब उनकी जेल में स्थिति को लेकर जो सवाल उठ रहे हैं, उसने पाकिस्तान की राजनीति में एक नया मोड़ जोड़ दिया है.

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