India-Taliban Friendship: भारत-तालिबान की दोस्ती अमेरिका को अच्छी नहीं लग रही है. सीएए, अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस के फ्रीज बैंक खाते का मुद्दा उठाने के बाद अमेरिका ने अब भारत-तालिबान दोस्ती का मुद्दा उठाया है. अमेरिका ने कहा कि सामूहिक हित को ध्यान में रखते हुए भारत को अफगानिस्तान के साथ एकीकृत रवैया अपनाना चाहिए. अमेरिका का बयान ऐसे समय में आया है, जब हाल के दिनों ने भारत कुछ अधिकारियों ने अफगानिस्तान का दौरा किया.


दरअसल, अमेरिका लगातार भारत के आंतरिक और विदेशी मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है. कुछ दिन पहले भारत के विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी जेपी सिंह ने काबुल का दौरा किया था. इस दौरान उन्होंने तालिभान के कई बड़े अधिकारियों से मुलाकात की. भारत के इस रवैये से अमेरिका नाराज हो गया है. वाइस ऑफ अमेरिका की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि थॉमस वेस्‍ट ने भारत के विदेश सचिव से अनुरोध किया है कि अफगानिस्तान को लेकर भारत सामूहिक हितों को ध्यान में रखते हुए कदम उठाए. थॉमस वेस्‍ट ने कहा कि इसके लिए भारत को एकीकृत राजनयिक रुख अपनाना चाहिए.


तालिबान पर लगे हैं अमेरिकी प्रतिबंध
मामला ये है कि भारत अमेरिका के खिलाफ तालिबान के कब्जे वाले अफगानिस्तान के साथ अपना रिश्ता मजबूती के साथ बनाए हुए है. चाइना ने तालिबानी राजदूत को अपने देश में मान्यता दे दी है, जिसके बाद भारत और अफगानिस्तान के रिश्ते नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए हैं. वहीं अमेरिका अब भी तालिबान को मान्यता देने से इनकार कर रहा है, ऐसे में भारत का यह रवैया अमेरिका को खटक रहा है. अमेरिका लगातार तालिबान को अलग-थलग करने की नीति पर आगे चल रहा है, अमेरिका ने तालिबान पर अमेरिकी प्रतिबंध जारी रखा है.


आखिर तालिबान से क्या चाहता है अमेरिका? 
कई राजनीतिक विश्लेषकों ने तालिबान पर अमेरिकी प्रतिबंधों का विरोध किया है, लेकिन बाइडेन अपनी बात पर कायम हैं. अमेरिका ने कहा है कि जबतक तालिबान महिलाओं को शिक्षा का अधिकार पुरुषों के बराबर नहीं देता है, अमेरिकी प्रतिबंद कायम रहेंगे. दूसरी तरफ पाकिस्‍तान के पूर्व राजदूत रुस्‍तम शाह महमूद ने कहा है कि भारत तालिबान के साथ व्यापार को आगे बढ़ाने के साथ मध्‍य एशिया के ऊर्जा स्रोतों पर अपनी पहुंच मजबूत करना चाहता है. 


आतंकवाद बड़ा मुद्दा
दूसरी तरफ भारत के विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने काबुल में तालिबानी अधिकारियों से मुलाकात के दौरान कहा कि भारत चाबहार पोर्ट के जरिए व्‍यापार को बढ़ाना चाहता है. तालिबानी सरकार ने कहा है कि वह चाबहार पोर्ट में निवेश करेगा और पाकिस्तानी पोर्ट से अपनी निर्भरता को कम करेगा, जिससे पाकिस्तान को भी मिर्ची लगी है. अमेरिका पाकिस्तान और तालिबान के आतंकियों से बचने के लिए लगातार उनपर कार्रवाई की बात करता है. दूसरी तरफ तालिबान ने कहा है कि तालिबान की धरती पर किसी भी आंतकवादी संगठन को पलने नहीं दिया जाएगा.


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