नई दिल्ली: बिहार में सियारी पारा अपने चरम पर है. 2019 से पहले सूबे की सियासत में सीटों के बंटवारे को लेकर एनडीए की पार्टियों का टकराव सामने आ रहा है. कल रात एनडीए की डिनर में भी सीट बंटवार का असर दिखा. चाहे वह राम विलास पासवान की पार्टी एलजेपी हो या फिर उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएसपी हो सभी पार्टियां अपने-अपने हिसाब से सीटों का दावा कर रही हैं. इस बीच सीट बंटवारे को लेकर नीतीश कुमार और बीजेपी की खींचतान तेज हो गई है. जेडीयू सूत्रों ने कहा कि बड़ी पार्टी होने के नाते बीजेपी बड़ा दिल दिखाए और समझौते के लिए हाथ बढ़ाए.
बिहार में लोकसभा की कुल 40 सीटे हैं. 2019 लोकसभा चुनाव में जेडीयू 25 सीटें मांग रही है. वहीं उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी ने पांच सीटों पर किया दावा है. इतना ही नहीं आरएलएसपी के कार्यकारी अध्यक्ष नागमणि ने यहां तक कह दिया कि 2020 के विधानसभा चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा को मुख्यमंत्री पद के लिए प्रोजेक्ट किया जाए.
वहीं एनडीए में शामिल लोक जनशक्ति पार्टी के लोकसभा सांसद चिराग पासवान ने कहा कि हर पिछली बार हम सात सीटों पर लड़े थे, इसपर मिल बैठकर बात कर लेंगे. वह पहले ही साफ कर चुके हैं, ''2014 में एनडीए का समीकरण कुछ और था आज एनडीए में और भी दल आए हैं. ऐसे में आने वाले चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर सभी दल मिलबैठ कर विचार करेंगे. नए फॉर्मूले पर बात होगी.''
दरअसल 2009 लोकसभा चुनाव में जेडीयू 25 और बीजेपी 15 सीटें लड़ती थी. इसी के तर्ज पर 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में जेडीयू एक बार फिर 25 सीटों की मांग की है. कहा जा रहा है कि इस मांग के साथ जेडीयू बीजेपी पर दबाव बनाना चाह रही है. हाल ही में हुए उपचुनाव में बीजेपी की करारी हार के बाद इसे जेडीयू का प्रेशर पॉलिटिक्स माना जा रहा है. अब ये देखना दिलचस्प होगा कि किसी कितनी सीटें मिलती हैं, लेकिन फिलहाल सूबे की सियासत का पारा अपने चरम पर है.
