संचार साथी ऐप की वजह से देश की सियासत में उबाल देखने को मिल रहा है. इस बीच विपक्ष की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें कहा गया है कि इसके जरिए किसी तरह की कोई जासूसी नहीं हो रही है, ना ही किसी तरह की कॉल मॉनिटरिंग है. अगर आप चाहते हैं तब इसको एक्टिवेट कीजिए, नहीं चाहते हैं तो एक्टिवेट नहीं करें. अगर फोन में रखना चाहते हैं तो रखें, नहीं रखना चाहते तो ना रखें. अगर डिलीट करना हो तो ऐप को डिलीट कर सकते हैं, यह मैंडेटरी नहीं है. ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस बयान के सामने आने पर प्रियंका चतुर्वेदी ने इसे जनता की जीत बताया है. उन्होंने कहा कि सरकार ने यह जो फैसला बदला है, यह जनता की जीत है, क्योंकि इससे पहले सरकार ने जो आदेश जारी किया था उसमें साफ तौर पर कहा था कि मोबाइल कंपनियां इस ऐप को फोन में डालकर भेजें, जो डिलीट भी ना हो पाए. हालांकि, सरकार के फैसले के पहले कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने नये मोबाइल हैंडसेट में ‘संचार साथी’ ऐप पहले से मौजूद होने संबंधी दूरसंचार विभाग के निर्देश को लेकर मंगलवार (2 दिसंबर 2025) को आरोप लगाया कि यह एक ‘जासूसी ऐप’ है. सरकार देश को तानाशाही में बदलने का प्रयास कर रही है. कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने जारी किया था नोटिस
कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने संचार साथी ऐप के खिलाफ नोटिस दिया था. उन्होंने कहा कि “निजता का अधिकार, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का अभिन्न हिस्सा है. दूरसंचार विभाग का स्मार्टफोन निर्माताओं और आयातकों को ‘संचार साथी’ ऐप को इस तरह पहले से ही इंस्टॉल करने का निर्देश देना कि उसे हटाया न जा सके, इस मौलिक अधिकार का गंभीर उल्लंघन है.” उन्होंने कहा कि ऐसा प्रावधान व्यापक निगरानी को सक्षम बनाता है और पर्याप्त सुरक्षा उपायों या संसदीय निगरानी के बिना नागरिकों की हर गतिविधि, संपर्क और निर्णय पर लगातार नजर रखने की आशंका पैदा करता है.
ये भी पढें: 'अनिवार्य नहीं, डिलीट कर सकते हैं ऐप', Sanchar Saathi पर मचे बवाल के बीच केंद्रीय मंत्री का बड़ा बयान