नई दिल्ली: राजस्थान हाई कोर्ट में कांग्रेस के बागी विधायकों की याचिका पर आज की सुनवाई पूरी हो गई. इस मामले में अब अगली सुनवाई अब सोमवार 20 जुलाई को सुबह दस बजे होगी. इस बीच हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए मंगलवार शाम पांच बजे तक बागी विधायकों पर कार्रवाई पर रोक लगा दी है. यानी 21 जुलाई शाम पांच बजे तक विधानसभा स्पीकर बागी विधायकों पर कोई कार्रवाई नहीं करेंगे. कांग्रेस के असंतुष्ट विधायकों को भेजे गए नोटिस पर अध्यक्ष की कार्रवाई मंगलवार शाम तक के लिए टाली गई.


बता दें कि सचिन पायलट और कांग्रेस के अन्य 18 बागी विधायकों की याचिका की पैरवी हरीश साल्वे ने की. हरीश साल्वे ने कहा कि स्पीकर पक्षपात कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि स्पीकर की मंशा ठीक नहीं लग रही है. वहीं मुकुल रोहतगी ने कहा कि पायलट गुट ने विद्रोह नहीं किया है. विधायकों ने पार्टी के भीतर आवाज उठाई है. अयोग्य ठहराने का मामला नहीं बनता है. मुकुल रोहतगी ने कहा कि विधायकों को परेशान किया जा रहा है.


इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील पेश की. विधानसभा अध्यक्ष की तरफ से पेश हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि स्पीकर का नोटिस देना सही है. पार्टी लाइन के खिलाफ बयान दिया इसलिए नोटिस जारी किया गया. विधायकों ने व्हिप का उल्लंघन किया है. वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने सचिन पायलट और 18 अन्य विधायकों की याचिका को प्रीमेच्योर बताया और याचिका खारिज करने की मांग की.


किन-किन विधायकों को भेजा गया नोटिस


यह नोटिस सचिन पायलट, रमेश मीणा, इंद्राज गुर्जर, गजराज खटाना, राकेश पारीक, मुरारी मीणा, पी. आर. मीणा, सुरेश मोदी, भंवर लाल शर्मा, वेदप्रकाश सोलंकी, मुकेश भाकर, रामनिवास गावड़िया, हरीश मीणा, बृजेन्द्र ओला, हेमाराम चौधरी, विश्वेन्द्र सिंह, अमर सिंह, दीपेंद्र सिंह और गजेंद्र शक्तावत को भेजा गया है.


सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड केस: महाराष्ट्र के गृहमंत्री बोले- CBI जांच की कोई जरूरत नहीं