कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ‘रचनात्मक कांग्रेस सम्मेलन’ में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि देश का सिस्टम ठीक से काम नहीं कर रहा है और सरकार लोगों, छात्रों तथा पीड़ितों की आवाज सुनने के बजाय उन पर अपना आदेश थोपना चाहती है. 

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राहुल गांधी ने संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि सदन में गृह मंत्री अमित शाह नहीं आए और सवाल किया कि वह 20 दिनों तक कहां गायब रहे. राहुल गांधी ने पूछा कि पीएम मोदी प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं करते हैं.

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री रात को नहीं सोते हैं. जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि छात्र अपनी बात रखना चाहते थे. वे दर्द में थे और अपनी समस्याएं बताना चाहते थे, लेकिन सरकार की ओर से कहा गया कि जंतर-मंतर पर व्यवस्था बनाए रखनी है और उन्हें अपनी बात कहने की इजाजत नहीं दी जाएगी.

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राहुल का केन्द्र पर हमला

राहुल गांधी ने उत्तराखंड की अंकिता भंडारी मामले का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि आज उनके पास एक महिला आई, जिसकी बेटी के साथ चार साल पहले उत्तराखंड में कथित तौर पर दुष्कर्म हुआ और उसकी हत्या कर दी गई.

राहुल गांधी के मुताबिक, वह महिला रो रही थी और अपनी बात रखने की कोशिश कर रही थी, लेकिन सिस्टम उससे कहता है कि अगर वह अपनी बात रखेगी तो अव्यवस्था पैदा होगी. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार की कार्यशैली और उसकी राजनीतिक सोच भारत पर एक ऐसा ‘ऑर्डर’ थोपने की है, जिससे सरकार और कुछ दूसरे लोगों को फायदा होता है.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस का काम इसके उलट है. कांग्रेस लोगों को अपनी बात कहने का अधिकार दिलाने और उस व्यवस्था को चुनौती देने का काम करेगी. राहुल गांधी ने कहा कि लोकतंत्र में आम लोगों, छात्रों और पीड़ितों की आवाज सुनी जानी चाहिए. उनके मुताबिक, सरकार का काम केवल व्यवस्था बनाए रखना नहीं, बल्कि लोगों के दर्द और उनकी समस्याओं को समझना भी है.

केन्द्र पर लगाए गंभीर आरोप

उन्होंने आरोप लगाया कि जब सरकार लोगों को बोलने से रोकती है तो कांग्रेस की जिम्मेदारी बनती है कि वह उनके साथ खड़ी हो और उनकी आवाज को सामने लाए. राहुल गांधी के इस बयान में केंद्र सरकार पर दो बड़े आरोप दिखाई दिए- पहला, सरकार संसद में विपक्ष के सवालों का जवाब देने से बच रही है और दूसरा, सरकार छात्रों तथा आम लोगों की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है. राहुल गांधी ने इसे सत्ता और विपक्ष की सामान्य राजनीतिक लड़ाई के बजाय देश में लोकतांत्रिक अधिकारों और लोगों की आवाज से जुड़ा मुद्दा बताया.