जन सुराज पार्टी के मुखिया प्रशांत किशोर मुश्किल में फंसते नजर आ रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उनको मतदाता पहचान पत्र को लेकर बवाल हो गया है. कहा जा रहा है कि प्रशांत का नाम दो राज्यों पश्चिम बंगाल और बिहार की वोटर लिस्ट में दर्ज है. अब इस मामले पर चुनाव आयोग ने अहम कदम उठाया है. पीके के वोटर आईडी कार्ड को लेकर पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से जानकारी मांगी गई है.

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केंद्रीय चुनाव आयोग ने बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से संपर्क किया है. उनसे प्रशांत किशोर के मामले को लेकर जानकारी मांगी गई है. हालांकि अभी तक बंगाल की तरफ से जवाब नहीं आया है.

पीके ने नए वोटर आईडी कार्ड के लिए किया था आवेदन

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चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक प्रशांत किशोर ने बिहार में आने के बाद फॉर्म 6 भरकर नया वोटर आईडी कार्ड बनवाया था, जबकि फॉर्म 6 साफ तौर पर कहता है कि वही लोग भरेंगे जो पहली बार मतदाता बनेंगे. इसके साथ ही उसमें शपथ भी दी जाती है कि मेरा कोई और वोटर कार्ड नहीं है और अगर यह जानकारी गलत पाई जाती है तो 2 साल की सजा का भी प्रावधान है.

नए मतदाता पहचान पत्र को लेकर क्या है नियम

अगर नियम की बात की जाए तो प्रशांत किशोर को फॉर्म 8 भरकर अपना वोट पश्चिम बंगाल से बिहार ट्रांसफर करवाना चाहिए था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. पीके ने इसकी जगह फॉर्म 6 भर दिया और नया आईडी कार्ड बनवा लिया. केंद्रीय चुनाव आयोग, बंगाल के निर्वाचन अधिकारी के जवाब का इंतजार कर रहा है. इसके बाद भी अगले कदम को लेकर जानकारी मिल सकेगी.

बिहार में कब होंगे चुनाव

बिहार विधानसभा चुनाव दो चरणों में पूरा होगा. पहला चरण के लिए 6 नवंबर को मतदान होगा. वहीं दूसरे चरण के लिए 11 नवंबर मतदान होगा. इसके बाद 14 नवंबर को नतीजे सामने आएंगे. जन सुराज ने अपने प्रत्याशियों की लिस्ट जारी कर दी है. उसका चुनावी मैदान में एनडीए गठबंधन और कांग्रेस के महागठबंधन से सामना होगा.