शिक्षा सुधारों को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार एक्शन मोड में हैं. ऐसे में 47 लोगों को हटा दिया गया है. साथ ही उनमें से कुछ के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी. सरकार नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में बड़े बदलाव की तैयारी में हैं. अगले एक महीने के अंदर इसके पूरे ढांचे को फिर से तैयार करने की योजना पर है. एक एक्सपर्ट्स कमेटी की सिफारिशों के आधार पर एजेंसी की आउटसोर्सिंग प्रोसेस में भी बदलाव किया जाएगा. सूत्रों के मुताबिक, एक ऐसा सिस्टम बनाया जाएगा जिसमें पेपर लीक होने की कोई गुंजाइश न हो.

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सूत्रों के मुताबिक, एग्जाम में बड़े सुधार लाने के लिए, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने 47 अधिकारियों को उनकी सर्विस से टर्मिनेट कर दिया है. इनमें से कुछ अधिकारियों के खिलाफ लीगल और क्रिमिनल एक्शन भी लिए जाएंगे. अभी और सुधार के एक्शन लिए जाएंगें. यह NTA में पूरे बदलाव का हिस्सा है जो पेपर लीक को लेकर विवादों में रहा है.

बाकी बर्खास्त लोगों ने अपने दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरती होगी, इसलिए उन पर कानूनी-कार्रवाई नहीं होगी. असली बात क्या है, यह आने वाले वक्त में ही पता चलेगा. क्या अब सीबीआई से ही कार्रवाई करवाई जाएगी या कोई अन्य एजेंसी को मामला सौंपा जाएगा.  यह कार्रवाई NTA में व्यापक सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान का हिस्सा है. मंत्रालय का कहना है कि आने वाले दिनों में एजेंसी के ढांचे और कार्यप्रणाली में सुधार से जुड़े कई और महत्वपूर्ण फैसले लिए जाएंगे.

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एनटीए में ज्यादातर कर्मी आउटसोर्स पर काम करते हैं

एनटीए का गठन 2017 में हुआ था. 2018 से लेकर अब तक यह एजेंसी 270 परीक्षाएं करवा चुकी है. इन परीक्षाओं में 6 करोड़ 60 लाख छात्र शामिल हुए. इस साल एनटीए ने अब तक 12 परीक्षाएं कराई हैं, जिनमें 65 लाख छात्रों ने एग्जाम दिया है. नीट परीक्षा में करीब 22 लाख छात्र शामिल हुए थे. एनटीए में 39 स्थायी पद स्वीकृत हैं, जिसमें सिर्फ 24 कार्यरत हैं और 15 पद खाली हैं. 73 लोग संविदा पर रखे गए हैं और 124 कर्मचारी आउटसोर्सिंग से हैं. सूत्रों का कहना है कि सरकार अगले एक महीने में NTA के पुनर्गठन की योजना पर काम कर रही है. एजेंसी की कार्यप्रणाली, परीक्षा संचालन और प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव किए जाएंगे. खबर है कि सबसे बड़ा बदलाव आउटसोर्सिंग व्यवस्था में होगा.

सरकार की पूरी कोशिश प्रस्तावित सुधारों पर है

इधर सरकार की पूरी कोशिश प्रस्तावित सुधारों पर रहेगा. इनका उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता को बढ़ाना है. पेपर लीक जैसी घटनाओं पर र्भावी रोक लगाना है. साथ ही कैंडिडेट के भरोसे को बहाल करना है. इसके तहत परीक्षा संचालन, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, निगरानी और जवाबदेही से जुड़े कई प्रावधान हैं. सरकार का मानना है कि मजबूत व्यवस्ता के जरिए भविष्य में किसी भी तरह की अनियमितता की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

पेपर लीक पर सजा कानून बनाने वाले बिल को कैबिनेट की मंजूरी

इससे पहले शुक्रवार को मोदी कैबिनेट ने मीटिंग में पेपर लीक पर सजा के कानून को सख्त बनाने से जुड़े बिल को मंजूरी देने का फैसला किया है. इस मीटिंग के बाद पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने भी बैठक की.  बिल में पेपर लीक के ऑर्गेनाइज्ड क्राइम के मामले में 10 साल की सजा और 10 करोड़ रुपये जुर्माने का प्रावधान रखा है. अगले हफ्ते संसद में इस बिल को पेश भी किया जाएगा.