कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला बोला है. खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि विपक्ष पर ईडी और सीबीआई जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि जनता के सवालों और विरोध-प्रदर्शनों का जवाब थप्पड़, लाठी और गोली से दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार लोगों के सवालों से इतनी घबरा गई है कि विपक्ष के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले 'नाराज़ फूफा', 'दिमागी नक्सल' और 'आंदोलनजीवी' जैसे शब्द भी अब फीके पड़ रहे हैं.

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खरगे बोले- भाजपा और आरएसएस सीधे हिंसा पर उतरे

खरगे ने अपनी पोस्ट में आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस अब सीधे हिंसा पर उतर आए हैं. उन्होंने लिखा कि दिल्ली में एक मंत्री ने एक युवा को थप्पड़ मारा. इसके साथ ही उन्होंने जंतर-मंतर पर युवाओं पर हुए लाठीचार्ज का जिक्र किया. खरगे ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की निगरानी में हुई.

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किसान आंदोलन और लखीमपुर खीरी का भी किया जिक्र

कांग्रेस अध्यक्ष ने किसान आंदोलन का भी जिक्र किया. उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान रबर की गोलियां चलीं और 750 किसानों की जान चली गई. इसके अलावा उन्होंने लखीमपुर खीरी की घटना का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि तत्कालीन केंद्रीय मंत्री के बेटे ने किसानों को गाड़ी से कुचल दिया. खरगे ने एक केंद्रीय मंत्री के 'गोली मारो...' वाले बयान का भी जिक्र किया. उन्होंने गुजरात के ऊना में दलितों के साथ हुई मारपीट का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वहां दलितों पर कोड़े बरसाए गए, लेकिन अब तक न्याय नहीं मिला.

'सत्ता का अहंकार चरम पर हो तो दमन आदत बन जाता है'

खरगे ने कहा कि जब सत्ता का अहंकार चरम पर पहुंच जाता है तो जनता का सार्वजनिक दमन और अपमान उसकी आदत बन जाता है. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस केवल नीतियों के जरिए लोकतंत्र को प्रभावित नहीं कर रहे, बल्कि अब लाठी-डंडे तानकर जनता पर सीधे प्रहार कर रहे हैं.

बेंगलुरु में खरगे ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर भी उठाए सवाल

बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत के दौरान खरगे ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि अब उनकी बात पर यह कहा जा सकता है कि ये केवल आरोप हैं, लेकिन उनके मुताबिक संबंधित लोगों की ओर से भी ऐसे बयान सामने आए हैं. खरगे ने पूर्व केरल मुख्य सचिव जीजी थॉमसन के कथित बयान का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने खुद उन्हें चुनाव लड़ने के लिए कहा था. थॉमसन ने दावा किया है कि 2016 में जब दोनों सरकारी सेवा में थे, तब ज्ञानेश कुमार ने उन्हें भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने का सुझाव दिया था. कांग्रेस ने इस आरोप के आधार पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त की भूमिका और निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं.

'मुख्य निर्वाचन आयुक्त को इस्तीफा दे देना चाहिए'

खरगे ने कहा कि अगर देश के सर्वोच्च चुनावी पद पर बैठे व्यक्ति पर इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर उनमें थोड़ा भी नैतिक अधिकार है तो उन्हें पद छोड़ देना चाहिए. खरगे ने आगे कहा कि इस्तीफा देने के बाद भी उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए.

विपक्ष के लिए दिए जाने वाले शब्दों पर भी साधा निशाना

खरगे ने भाजपा पर विपक्ष के सवालों से बचने के लिए अलग-अलग राजनीतिक विशेषणों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया. उन्होंने 'नाराज़ फूफा', 'दिमागी नक्सल' और 'आंदोलनजीवी' जैसे शब्दों का जिक्र करते हुए कहा कि लोगों के सवालों का जवाब देने के बजाय विपक्ष को अलग-अलग नाम दिए जा रहे हैं. 'नाराज़ फूफा' और 'दिमागी नक्सल' जैसे शब्दों को लेकर खरगे पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पलटवार कर चुके हैं. खरगे ने अपनी पोस्ट के अंत में आरोप लगाया कि लोकतंत्र में जनता के सवालों का जवाब देने के बजाय सत्ता अब दमन का रास्ता अपना रही है. उन्होंने कहा कि जनता पर लाठी-डंडे चलाकर लोकतंत्र को नहीं दबाया जा सकता.

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