16th Finance Commission: केंद्र सरकार ऐसा कदम उठाने जा रही है, जिससे राज्य सरकारों की कमाई कम हो जाएगी. मुमकिन है कि अगले वित्त वर्ष से राज्यों को केंद्र सरकार से मिलने वाले राजस्व में 1 फीसदी की कमी आए. सूत्रों के मुताबिक 16वां वित्त आयोग राज्यों के मौजूदा हिस्सेदारी 41 फीसदी से कम कर 40 फीसदी करने का सुझाव दे सकता है. जब 14वां वित्त आयोग था तो उस दौरान राज्यों को 42 फीसदी हिस्सेदारी मिलता था, जिसके बाद केंद्र सरकार की सिफारिश पर 15वें वित्त आयोग ने इसको घटाकर 41 फीसदी कर दिया था.

राज्यों से चर्चा के बाद संसद में पेश होगी रिपोर्ट

16वें वित्त आयोग की सिफारिश साल 2026-27 से लागू होगी. अर्थशास्त्री अरविंद पनगढ़िया 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष हैं. पनगढ़िया की अध्यक्षता में लगातार कमेटी राज्यों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा कर रही है और आने वाले दिनों में राज्यों के साथ चर्चा के बाद जो सुझाव निकल कर सामने आएंगे उसके बारे में केंद्र सरकार को रिपोर्ट के जरिए जानकारी देंगे. बाद में वह रिपोर्ट संसद में पेश की जाएगी.

6वें वित्त आयोग की सिफारिश कब से लागू होगा

संसद से जैसे ही इस सुझाव को मंजूरी मिलेगी 16वें वित्त आयोग की सिफारिश को अगले वित्तीय वर्ष यानी साल 2026-27 से लागू कर दिया जाएगा. एक वित्तीय आयोग का कार्यकाल 5 साल का होता है और उसकी सिफारिश 5 साल तक लागू रहती है. इसके पीछे दलील ये दी जा रही है कि सरकार का टैक्स के जरिए आने वाला राजस्व लगातार बढ़ रहा है और राज्यों को भी उसका सीधा फायदा मिल रहा है.

ऐसे में भले ही राज्यों के प्रतिशत में कमी आ जाए, लेकिन उनकी कमाई पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा, उल्टा राज्यों का राजस्व पहले से ज्यादा ही रहेगा, क्योंकि सरकार को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर से जो राजस्व मिल रहा है उसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है और वित्त आयोग की सिफारिश उसी को ध्यान में रखते हुए की जा सकती है.

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