Bharat Bandh  27 September: केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा ने कल (27 सितंबर) भारत बंद का आह्वान किया है. किसानों के इस भारत बंद को कांग्रेस, लेफ्ट पार्टियां, आरजेडी, बीएसपी और एसपी समेत देश की लगभग सभी विपक्षी पार्टियों ने अपना समर्थन दिया है. इसके अलावा बैंक यूनियन भी इस भारत बंद का साथ दे रही है. बंद का आह्वान सोमवार सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक के लिए किया गया है. केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों से आंदोलन का रास्ता छोड़ बात करने की अपील की है.


केंद्रीय कृषि मंत्री ने क्या कहा?


केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भारत बंद को लेकर कहा कि मैं किसानों से आग्रह करना चाहता हूं कि आंदोलन का रास्ता छोड़कर वार्ता का रास्ता अपनाएं. सरकार उनके द्वारा बताए गई आपत्ति पर विचार करने को तैयार है. इससे पहले भी कई बार बात हो चुकी है. कोई बात बची है तो सरकार जरूर बात करने को तैयार है. उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन को राजनीति से नही जोड़ना चाहिये, किसान सबका है और सरकार ने बहुत संवेदनशीलता के साथ किसान यूनियन के साथ बातचीत की है और आगे भी करने के लिए तैयार है.


ये पार्टियां करेंगी समर्थन


कांग्रेस और राजद ने इसको लेकर बैठकी और कहा कि आने वाले 27 तारीख को किसानों द्वारा भारत बंद का ऐलान किया गया है, उसपर हम सभी लोगों ने राय बनाई है कि हम सभी लोग किसानों के साथ रहेंगे और भारत बंद का महागठबंधन की सारी पार्टियां समर्थन करेंगी. इसके अलावा आम आदमी पार्टी ने भी भारत बंद के समर्थन का एलान किया है. लेफ्ट पार्टियों ने भी भारत बंद का साथ देना का एलान किया है.


मायावती की पार्टी बीएसपी ने भी भारत बंद का समर्थन करने की बात कही है. उनके अलावा समाजवादी पार्टी भी भारत बंद का समर्थन करेगी. एसपी नेता और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ट्वीट किया "भाजपा सरकार के काले कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलित किसानों के द्वारा कल बुलाए गए "भारत बंद" का समाजवादी पार्टी पूर्ण समर्थन करती है. किसान विरोधी काले कानूनों को वापस ले सरकार.


बैंक यूनियन भी साथ


अखिल भारतीय बैंक अधिकारी परिसंघ (एआईबीओसी) ने कल के 'भारत बंद' को अपना समर्थन देने की घोषणा की है. एआईबीओसी ने सरकार से संयुक्त किसान मोर्चा की मांगों पर उसके के साथ फिर से बातचीत शुरू करने और तीन विवादित कृषि कानूनों को रद्द करने का अनुरोध किया. यूनियन ने एक बयान में कहा कि एआईबीओसी के सहयोगी और राज्य इकाइयां सोमवार को पूरे देश में किसानों के विरोध प्रदर्शनों के साथ एकजुटता दिखायेंगी.


दिल्ली पुलिस ने की खास तैयारी


दिल्ली पुलिस ने 'भारत बंद' से पहले राष्ट्रीय राजधानी के सीमावर्ती इलाकों में गश्त बढा दी है और अतिरिक्त कर्मियों को तैनात किया है. किसानों के आंदोलन की अगुवाई कर रहे 40 से अधिक कृषि यूनियन के निकाय संयुक्त किसान मोर्चा ने इससे पहले लोगों से बंद में शामिल होने की अपील की थी. पुलिस के अनुसार, गश्त बढ़ा दी गई है, चौकियों पर, विशेष रूप से सीमावर्ती इलाकों में अतिरिक्त कर्मियों को तैनात किया गया है और राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश करने वाले हर वाहन की पूरी जांच की जा रही है.


पुलिस उपायुक्त (नई दिल्ली) दीपक यादव ने कहा, ‘‘भारत बंद के मद्देनजर एहतियात के तौर पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं. सीमावर्ती इलाकों में जांच चौकियों को मजबूत किया गया है और इंडिया गेट एवं विजय चौक सहित सभी महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों में पर्याप्त तैनाती की जाएगी.’’


सुबह 6 से शाम 6 तक भारत बंद


एसकेएम ने हाल में जारी एक बयान में कहा था, ‘‘इस ऐतिहासिक संघर्ष के दस महीने पूरे होने पर एसकेएम ने केंद्र सरकार के खिलाफ सोमवार (27 सितंबर) को 'भारत बंद' का आह्वान किया है. बयान में कहा गया था, ‘‘एसकेएम हर भारतीय से इस देशव्यापी आंदोलन में शामिल होने और 'भारत बंद' को व्यापक रूप से सफल बनाने की अपील करता है। विशेष रूप से, हम कामगारों, व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों, कारोबारियों, विद्यार्थियों, युवाओं और महिलाओं तथा सभी सामाजिक आंदोलनों के संगठनों से उस दिन किसानों के साथ एकजुटता दिखाने की अपील करते हैं.’’


बयान में कहा गया, बंद सुबह छह बजे से शाम चार बजे तक होगा, जिस दौरान पूरे देश में सभी सरकारी और निजी कार्यालय, शैक्षणिक और अन्य संस्थान, दुकानें, उद्योग और वाणिज्यिक प्रतिष्ठान के साथ-साथ सार्वजनिक कार्यक्रम और अन्य कार्यक्रम बंद रहेंगे. इसमें कहा गया था, अस्पताल, मेडिकल स्टोर, राहत और बचाव कार्य सहित सभी आपातकालीन प्रतिष्ठानों और आवश्यक सेवाओं और व्यक्तिगत आपात स्थितियों में भाग लेने वाले लोगों को छूट दी जाएगी.


देश के विभिन्न हिस्सों, विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान, पिछले साल नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रदर्शनकारी तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं, जिसको लेकर उन्हें डर है कि इससे न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रणाली को खत्म कर दिया जाएगा तथा उन्हें बड़े कार्पोरेट की दया पर छोड़ दिया जाएगा. हालांकि, सरकार तीन कानूनों को प्रमुख कृषि सुधारों के रूप में पेश कर रही है. दोनों पक्षों के बीच 10 दौर से अधिक की बातचीत गतिरोध को तोड़ने में विफल रही है.



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