Atiq Ahmed And His Brother Shot Dead: प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई खालिद अजीम उर्फ अशरफ को पुलिस कस्टडी में गोलियों से भून डाला गया. शहर में हुए इस हाई प्रोफाइल डबल मर्डर की गूंज सिर्फ प्रदेश में ही नहीं, बल्कि देश भर में सुनाई दे रही है.


उत्तर प्रदेश पुलिस की लापरवाही से लेकर घटना को रोकने में नाकाम रहने को लेकर विपक्षी दलों के निशाने पर सूबे की योगी सरकार आ गई है. ऑन कैमरा अंजाम दिए गए इस हत्याकांड के बाद से ही राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. आइए जानते हैं कि राष्ट्रीय पार्टियों ने इस घटना पर क्या कुछ कहा है.


भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस


कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने घटना की निंदा करते हुए कहा, ''गोलीतंत्र और भीड़तंत्र की वकालत करने वाले केवल संविधान को ध्वस्त करते हैं.'' खरगे ने ट्विटर पर लिखा, "देश का संविधान उन लोगों ने बनाया है, जो आज़ादी के लिए लड़े थे. हमारा इसी संविधान और कानून को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है. इससे खिलवाड़ करने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती है. अपराधी की सजा का फ़ैसले का अधिकार न्यायपालिका का है."


कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने लिखा, ''हमारे देश का क़ानून संविधान में लिखा गया है, यह क़ानून सर्वोपरि है. अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए, मगर देश के क़ानून के तहत होनी चाहिए. किसी भी सियासी मक़सद से क़ानून के राज और न्यायिक प्रक्रिया से खिलवाड़ करना या उसका उल्लंघन करना हमारे लोकतंत्र के लिए सही नहीं है.''


भारतीय जनता पार्टी


बीजेपी की तरफ से घटना को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. हालांकि, उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और राज्य में बीजेपी के अध्यक्ष रहे स्वतंत्र देव सिंह ने बिना किसी का नाम लिए हुए कहा कि पाप और पुण्य का हिसाब इसी जन्म में होता है. प्रदेश सरकार के एक अन्य मंत्री सुरेश खन्ना ने इसे आसमानी फैसला बताया है.


बहुजन समाज पार्टी


बहुजन समाज पार्टी की नेता और यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने ट्वीट कर लिखा, ''गुजरात जेल से अतीक अहमद व बरेली जेल से लाए गए उनके भाई अशरफ की प्रयागराज में कल रात पुलिस हिरासत में ही खुलेआम गोली मारकर हुई हत्या, उमेश पाल जघन्य हत्याकांड की तरह ही, यूपी सरकार की कानून-व्यवस्था व उसकी कार्यप्रणाली पर अनेकों गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े करती है. देश भर में चर्चित इस अति-गंभीर व अति-चिन्तनीय घटना का माननीय सुप्रीम कोर्ट अगर स्वंय ही संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई करे तो बेहतर. वैसे भी उत्तर प्रदेश में ’’कानून द्वारा कानून के राज’’ के बजाय, अब इसका एनकाउंटर प्रदेश बन जाना कितना उचित? सोचने की बात.''


कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सवादी)


मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPIM) ने एक बयान जारी कर अतीक और अशरफ की हत्या की निंदा की है. सीपीआईएम के पोलित ब्यूरो की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि "पुलिस हिरासत में और मीडिया के सामने अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की जघन्य हत्या से पता चलता है कि उत्तर प्रदेश पूरी तरह से कानूनविहीन राज्य बन गया है."


आम आदमी पार्टी


आम आदमी पार्टी को बीते साल गुजरात में हुए विधानसभा चुनाव में प्रदर्शन के बाद इसी महीने चुनाव आयोग ने राष्ट्रीय दल का दर्जा दिया है. पार्टी की दो राज्यों दिल्ली और पंजाब में सरकार है. साथ ही कई राज्यों में इसके विधायक हैं. आम आदमी पार्टी ने अतीक और अशरफ की हत्या पर कोई बयान नहीं दिया है.


नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी)


एनपीपी को पूर्वोत्तर के चार राज्यों में 'प्रादेशिक राजनीतिक दल' का दर्जा हासिल होने के कारण 2019 में राष्ट्रीय राजनीतिक दल का दर्जा दिया गया. इसके नेता कोनराड संगमा या फिर पार्टी की तरफ से कोई बयान प्रयागराज की घटना पर नहीं आया है.


यह भी पढ़ें


Atiq Ahmed Killed: अतीक-अशरफ को कैसे उतारा मौत के घाट? चश्मदीदों ने सुनाया हत्याकांड के एक-एक पल का आंखों देखा हाल