Vat Savitri Vrat 2026 Highlight: वट सावित्री व्रत 2027 में कब ? अभी से नोट कर लें डेट
Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री व्रत 16 मई को है. ज्येष्ठ अमावस्या पर सुहागिनें वट सावित्री व्रत का पालन कर बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं, जानें इस व्रत की सभी जानकारी.
जागृति सोनी बरसलेLast Updated: 16 May 2026 01:06 PM

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Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री व्रत 16 मई 2026 को है. वट सावित्री व्रत अर्थात वो दिन जब यमराज को भी एक पत्नी की जिद और उसकी श्रद्ध का...More
Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री व्रत 16 मई 2026 को है. वट सावित्री व्रत अर्थात वो दिन जब यमराज को भी एक पत्नी की जिद और उसकी श्रद्ध का आगे झुककर अपना फैसला बदलना पड़ा और देवी सावित्री के पति के प्राण दोबारा लौटाने पड़े.ग्रंथों के अनुसार इस व्रत को करने से पति की आयु लंबी होती है और दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है. विवाहित महिलाएं इस दिन निर्जला या फलाहार व्रत रखकर मां सावित्री और वट वृक्ष की पूजा करती हैं.वट सावित्री व्रत तिथि और मुहूर्तज्येष्ठ अमावस्या तिथि शुरू होगी 16 मई 2026 को सुबह 5.11 पर और समाप्ति 17 मई 2026 को सुबह 1.30 पर होगी.पूजा मुहूर्त - सुबह 7.12 - सुबह 8.2416 या 17 मई को लेकर कंफ्यूजन क्यों है?हर साल वट सावित्री व्रत की तारीख को लेकर संशय इसलिए होता है क्योंकि अलग-अलग पंचांगों में अमावस्या तिथि के प्रारंभ और समाप्ति समय में अंतर दिखाई देता है. लेकिन उदया तिथि और ज्येष्ठ अमावस्या के आधार पर अधिकांश उत्तर भारतीय पंचांगों के अनुसार वट सावित्री व्रत 16 मई 2026 को ही मान्य रहेगा.इस दिन किसकी पूजा होती हैवट सावित्री व्रत में मुख्य रूप से देवी सावित्री, सत्यवान और वट वृक्ष की पूजा की जाती है. कई स्थानों पर भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश का भी ध्यान किया जाता है, क्योंकि धार्मिक मान्यता के अनुसार वट वृक्ष में त्रिदेव का वास माना गया है.बरगद का पेड़ यानी वट वृक्ष को अमरत्व और जीवन शक्ति का प्रतीक माना गया है. इ इसकी जड़ें और लंबी आयु स्थिरता, सुरक्षा और अखंड सौभाग्य का प्रतीक मानी जाती हैं. महिलाएं वट वृक्ष की परिक्रमा कर कच्चा सूत बांधती हैं और अपने पति की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं.क्या है वट सावित्री व्रत की कहानी वट सावित्री व्रत का उल्लेख स्कंद पुराण और भविष्य पुराण में मिलता है. कथा के अनुसार राजकुमारी सावित्री का विवाह सत्यवान से हुआ था. विवाह से पहले ही ऋषियों ने बता दिया था कि सत्यवान की आयु बहुत कम हैलेकिन सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और पति के प्रति समर्पण से यमराज को भी विवश कर दिया.जब यमराज सत्यवान के प्राण लेकर जाने लगे, तब सावित्री ने उनका पीछा किया और अपनी बुद्धिमानी, तप और पतिव्रता धर्म से प्रसन्न करके अपने पति के प्राण वापस प्राप्त किए. तभी से ये व्रत किया जाने लगा.कहां मनाते हैं वट सावित्री अमावस्याउत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, पंजाब और हरियाणा आदि राज्य में वट सावित्री अमावस्या पर इस व्रत का पालन किया जाता है. वहीं महाराष्ट्र और गुजरात में वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ पूर्णिमा पर मनाया जाता है जो इस साल 29 जून 2026 को है.
Vat Savitri Vrat 2027 Date: वट सावित्री व्रत 2027 में कब
अगले साल वट सावित्री अमावस्या 4 जून 2027 शुक्रवार को होगी और वट पूर्णिमा 14 जून 2027 को मनाई जाएगी.