Shani Vakri 2025 Prediction:13 जुलाई से क्या हो रहा है? लोग इस बारे में जानने के लिए गूगल कर रहे हैं सोशल मीडिया पर इससे जुड़े टॉपिक सर्च कर रहे हैं. पंचांग अनुसार 13 जुलाई 2025 को शनि मीन राशि में वक्री (Retrograde) हो रहे हैं, शनि देव (Shani Dev) यहां पर 29 नवंबर 2025 तक वक्री रहेंगे.

शनि जब वक्री (Vari 2025) होते हैं, तो उनका असर सामान्य से कहीं ज्यादा होता है, तीन गुना तक. यही कारण है इस गोचर से लोग खौफ खा रहे हैं. शनि जब वे मीन राशि में हो (जो कि जल, धर्म और मुक्ति की राशि है), तो यह पूरी दुनिया के लिए नर्म दिखने वाला लेकिन बहुत कठोर समय बन जाता है.

ज्योतिष ग्रंथ फलदीपिका के अनुसार-

वक्रे शनिः समुत्पन्ने यः प्रभावो महीतले.स चिरं तिष्ठति लोके, पापं सौख्यविनाशनम्॥

मतलब, जब शनि वक्री होते हैं तो लंबे समय तक दर्द देने वाली घटनाओं की शुरुआत करते हैं. यानि इसका असर देश-दुनिया पर भी देखने को मिलता है. जिओ पॉलिटिक्स भी प्रभावित होती है, जिन देश में डेमोक्रेटिव व्यवस्था है वहां पर इसका व्यापक प्रभाव दिखाई देता है, क्योंकि शनि लोकतांत्रिक व्यवस्था के भी कारक हैं.

किन देशों को सबसे ज्यादा असर होगा?वर्तमान समय शनि मीन गोचर कर रहे हैं, मीन राशि के स्वामी देव गुरु बृहस्पति हैं, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन देशों का संबंध मीन राशि से है, वहां पर विशेष प्रभाव देखने को मिल सकता है.

मीन राशि से प्रभावित प्रमुख देश कौन से हैं?

  1. इज़रायल
  2. फिलिस्तीन
  3. मिस्र
  4. दक्षिण इटली
  5. जॉर्डन

इनके विरोधी देश

  1. ईरान
  2. पाकिस्तान

त्रिकोणीय असर वाले देश

  1. भारत
  2. चीन
  3. रूस
  4. यूक्रेन

वक्री शनि के दौरान क्या-क्या हो सकता है?

13 जुलाई 2025संकेत: इस दिन से दुनिया में धीरे-धीरे टकराव, धार्मिक झगड़े और जल संकट के लक्षण दिखने को मिल सकते हैं.

मीनराशिगतः शनिः वक्रो यदि स्यात् विपदाश्रयः.(यानी मीन राशि में वक्री शनि हो तो संकट तय है.)

4 अगस्त 2025संकेत: कहीं हमला, आगजनी या बॉर्डर पर फायरिंग जैसी घटना संभव.

मंगल शनिदृष्टौ यदा, रणे रुधिरवर्षणम्.(मतलब युद्ध या हिंसा के योग)

11 अगस्त 2025संकेत: शनि की कुंभ राशि में चंद्रमा का गोचर किसी धार्मिक स्थल या तीर्थ में भगदड़ या उथल-पुथल की संभावना.

चंद्रशनी समायुक्ते शोक: संताप एव च.(जनता में चिंता और गलतफहमी बढ़ती है.)

2-3 सितंबर 2025संकेत: गुमराह करने वाली धार्मिक बातें, किसी नेता या संस्था का पर्दाफाश.

गुरु राहु यदि संयुक्तं धर्मभ्रंशं प्रसादयेत्.

16 सितंबर 2025संकेत: पुल गिरना, बाढ़, जलमार्ग से दुर्घटना के संकेत.

शनि–चंद्रमसंयुक्ते... जलप्रलयः.

23 सितंबर 2025संकेत: किसी देश द्वारा युद्ध की आधिकारिक घोषणा या फिर सैन्य कार्रवाई के संकेत.

सूर्यशनी दृष्टियोगे नृपद्वेषो.(मतलब सरकारें टकराव की ओर बढ़ती हैं.)

28 अक्टूबर 2025संकेत: बड़ी घटना, युद्ध, प्राकृतिक आपदा या धार्मिक हिंसा के संकेत.

29 नवंबर 2025 – शनि मार्गीसंकेत: पिछले 4.5 महीनों में छिपा हुआ था, उसका फैसला होगा. जैसे युद्ध का नतीजा, बड़े लोगों की गिरफ्तारी, धार्मिक संस्थाओं का बदलना. बड़े स्कैंडल में सजा की प्रक्रिया का आरंभ होना. जैसी स्थितियां देखने को मिल सकती हैं.

पूरी दुनिया में कौन-कौन सी समस्याएं गहराएंगी?

विषय  संभावित संकट
पानी बाढ़, सूखा, नदियों पर पुल टूटना
धर्म धार्मिक संस्थाओं में विवाद, झगड़े
युद्ध  इज़रायल–ईरान, रूस-यूक्रेन, भारत-चीन टकराव
वैश्विक राजनीति  UN, ICC जैसी संस्थाएं निष्क्रिय दिख सकती हैं

शनि वक्री से लोगों को घबराने या भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है, यह भावनात्मक और मानसिक परीक्षा का समय है. जो लोग धैर्य, संयम और सच्चाई का साथ देंगे, उन्हें शनि का आशीर्वाद मिलेगा. वहीं जो धोखा, हिंसा या झूठे धर्म के साथ हैं उनके लिए ये 138 दिन भारी पड़ सकते हैं.

सारावली के अनुसार धर्मनिष्ठस्य पीडा नास्ति विशेषतः. यानी जो धर्म के पथ पर हैं, उन्हें शनि कष्ट नहीं देते हैं. शनि का वक्री होना यह केवल खगोलीय घटना नहीं है. यह समय है जब दुनिया को अपने पुराने कर्मों का हिसाब देना है. इस बार शनि देव धर्म, युद्ध और जल तीनों क्षेत्रों में बड़ा उलटफेर का संकेत दे रहे हैं.

FAQsQ. शनि वक्री कब से कब तक हैं?A. 13 जुलाई से 29 नवंबर 2025 तक.

Q. भारत पर क्या असर होगा?A. धार्मिक तनाव, आतंक की घटनाएं, सीमाई तनाव संभव.

Q. दुनिया में सबसे संवेदनशील देश कौन से हैं?A. इजरायल, ईरान, रूस, यूक्रेन, भारत, चीन, अमेरिका.

Q. इसका समाधान क्या है?A. संयम, न्यायप्रियता, और सेवा. शनि इन्हीं की परीक्षा लेते हैं.

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