Solar Eclipse 2026:साल 2026 में सावन महीने के दौरान 12 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है. सूर्य ग्रहण और सावन का एक साथ पड़ना इसे धार्मिक दृष्टि से चर्चा का विषय बना रहा है.
हालांकि, यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं माना जाएगा. इसके बावजूद कई शिव भक्त यह जानना चाहते हैं कि इस दिन पूजा-पाठ और सावन के नियमों को लेकर किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
सावन में सूर्य ग्रहण क्यों माना जा रहा खास?
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है. वहीं सूर्य ग्रहण एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है. जब ग्रहण सावन के दौरान पड़ता है, तो धार्मिक दृष्टि से इसकी चर्चा अधिक होती है.
हालांकि, भारत में ग्रहण दिखाई न देने के कारण सामान्य धार्मिक गतिविधियों पर इसका प्रभाव नहीं माना जाता. फिर भी कई श्रद्धालु इस दिन भगवान शिव का स्मरण, मंत्र जाप और ध्यान करना शुभ मानते हैं.
क्या भारत में सूतक काल लगेगा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिस स्थान पर ग्रहण दिखाई नहीं देता, वहां सूतक काल मान्य नहीं माना जाता. चूंकि 12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक लागू नहीं होगा.
ऐसे में मंदिरों में सामान्य पूजा-पाठ और श्रद्धालु अपनी नियमित शिव आराधना कर सकते हैं.
शिव भक्त किन बातों का रखें ध्यान?
नियमित शिव पूजा करें
अगर आप सावन सोमवार का व्रत रख रहे हैं या रोज शिव पूजा करते हैं, तो अपनी दिनचर्या सामान्य रूप से जारी रख सकते हैं.
'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें
धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन में भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करना शुभ माना जाता है.
जलाभिषेक करें
सावन में शिवलिंग पर जल या गंगाजल अर्पित करने की परंपरा है. ग्रहण भारत में न दिखने के कारण इसमें कोई धार्मिक बाधा नहीं मानी जाती.
मन को शांत रखें
धार्मिक दृष्टि से सावन आत्मचिंतन, संयम और सकारात्मक सोच का महीना माना जाता है. इसलिए क्रोध, विवाद और नकारात्मकता से दूर रहने की सलाह दी जाती है.
जरूरतमंदों की सहायता करें
सावन में दान-पुण्य और सेवा को भी शुभ कर्म माना गया है. अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों की मदद की जा सकती है.
क्या ग्रहण का राशियों पर असर माना जाएगा?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का प्रभाव राशियों और जन्म कुंडली के आधार पर देखा जाता है. हालांकि, किसी भी व्यक्ति के जीवन पर सटीक प्रभाव जानने के लिए केवल राशि नहीं, बल्कि पूरी जन्म कुंडली का विश्लेषण जरूरी माना जाता है.
एस्ट्रोलॉजर नीतिका शर्मा के अनुसार, सावन और सूर्य ग्रहण का एक साथ पड़ना धार्मिक दृष्टि से लोगों की आस्था का विषय हो सकता है, लेकिन भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण सूतक काल मान्य नहीं होगा.
उनका कहना है कि शिव भक्तों को किसी तरह के भ्रम या डर में आने की जरूरत नहीं है. सावन के दौरान श्रद्धा के साथ भगवान शिव की पूजा, जलाभिषेक, मंत्र जाप और अच्छे कर्म करना ही सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है.
नीतिका शर्मा के मुताबिक, ग्रहण के नाम पर भय फैलाने के बजाय श्रद्धा, संयम और सकारात्मक सोच के साथ भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए.
FAQ
सावन 2026 में सूर्य ग्रहण कब लगेगा?12 अगस्त 2026, बुधवार को पूर्ण सूर्य ग्रहण लगेगा.
क्या यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा?नहीं, यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा.
क्या भारत में सूतक काल मान्य होगा?नहीं. धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण दिखाई न देने पर सूतक काल मान्य नहीं होता.
क्या सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ा सकते हैं?हां, भारत में ग्रहण न दिखने के कारण श्रद्धालु सामान्य रूप से शिवलिंग पर जलाभिषेक कर सकते हैं.
सावन में कौन-सा मंत्र जपना शुभ माना जाता है?'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप भगवान शिव की आराधना के लिए शुभ माना जाता है.
यह भी पढ़ें- Monsoon: रूठे मानसून को मनाने के लिए गधे को गुलाब जामुन तो कहीं श्मशान में बुवाई, अनोखे टोटके अपना रहे लोग
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
