Indira Ekadashi 2026: कल एकादशी का व्रत रखना है. आपने फल मंगा लिए, पूजा की तैयारी भी कर ली. तभी घर में कोई कहता है, आज रात खाना मत खाना. अब उलझन है. व्रत 6 अक्टूबर को है, तो 5 अक्टूबर का भोजन क्यों छोड़ना है? और अगर रात में खाना खा लिया, तो क्या कल व्रत नहीं रख सकते?

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इस नियम का संबंध दशमी से की जाने वाली तैयारी से है. कठोर व्रत विधि में पिछली रात का भोजन छोड़ा जाता है. लेकिन इसे हर व्यक्ति के लिए पिछली रात से निर्जला रहने का आदेश समझना गलत है.

एकादशी कब शुरू होगी?

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इंदिरा एकादशी का व्रत मंगलवार 6 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा. भारतीय समयानुसार एकादशी तिथि 6 अक्टूबर को तड़के 2:07 बजे शुरू होगी. इसका समापन 7 अक्टूबर को मध्यरात्रि के बाद 12:34 बजे होगा. यानी 5 अक्टूबर की शाम को दशमी ही रहेगी.

इस बार रात का भोजन छोड़ने की वजह शाम से एकादशी लगना नहीं है. वजह है दशमी का आहार संयम. तिथि शुरू होने का समय और व्रत की तैयारी, दोनों को एक समझने से यह भ्रम पैदा होता है.

दशमी को भोजन का क्या नियम है?

एकादशी की पारंपरिक व्यवस्था में तीन दिन जुड़े हैं. दशमी को भोजन में संयम रखा जाता है. एकादशी को उपवास होता है. द्वादशी को पारण करके व्रत पूरा किया जाता है. कठोर विधि अपनाने वाले श्रद्धालु दशमी की दोपहर एक बार भोजन करते हैं. इसी को एकभुक्त कहा जाता है. इस विधि में रात का भोजन नहीं होता.

इसलिए जिस घर में दशमी को एकभुक्त की परंपरा है, वहां आज रात भोजन छोड़ने की बात कही जाएगी. कैलेंडर में केवल मुख्य व्रत की तारीख देखकर इस तैयारी का नियम समझ नहीं आता.

फलाहार रखने वालों को भी रात का खाना छोड़ना है?

फलाहार करना और दशमी को एकभुक्त यानी दिन में एक बार भोजन करना या एक समय खाना अलग नियम हैं. केवल यह कहने से कि मैं कल फलाहार करूंगा, पिछली रात की विधि तय नहीं हो जाती. इसमें आपकी पारिवारिक या संप्रदाय की परंपरा भी मायने रखती है.

हिंदू पंचांग के अनुसार श्रद्धालु संकल्प में अपनी क्षमता के अनुसार व्रत का स्वरूप चुन सकते हैं. इसलिए किसी दूसरे व्यक्ति का कठोर उपवास देखकर अपना नियम अचानक बदलना जरूरी नहीं. भोजन छोड़ने की बात का अर्थ अपने आप पानी छोड़ना भी नहीं है.

आज रात खाना खा लिया तो कल व्रत रख सकते हैं?

पिछली रात भोजन कर लेने भर से अगले दिन व्रत रखने का रास्ता बंद नहीं होता. हिंदू पंचांग मुख्य एकादशी उपवास की शुरुआत स्थानीय सूर्योदय से बताता है. पिछली शाम से भोजन छोड़ना कुछ श्रद्धालुओं की अतिरिक्त साधना है. हालांकि आपने दशमी को एकभुक्त रहने का संकल्प लिया है, तो रात का भोजन उस चुनी हुई विधि के अनुरूप नहीं होगा.

इसलिए पहले अपनी विधि स्पष्ट रखें. दशमी का संयम अपनाना है, फलाहार करना है या पूर्ण उपवास रखना है? इसी के अनुसार तैयारी करें. 6 अक्टूबर का व्रत रख सकते हैं, 5 अक्टूबर की रात भोजन का निर्णय अपनी अपनाई हुई व्रत विधि से करें. तिथि के तड़के 2:07 बजे शुरू होने का मतलब उस समय उठकर भोजन-पानी बंद करना नहीं है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.