Pitru Paksha: महीनों बाद नौकरी मिली है. कंपनी ने जॉइनिंग की तारीख भी दे दी. घर में खुशी है, लेकिन तभी कोई कहता है, पितृ पक्ष चल रहा है. अभी नया काम मत करो.

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अब मुश्किल यह है कि कंपनी इंतजार नहीं करेगी. तारीख टाली तो नौकरी भी जा सकती है. क्या ऐसे में मौका छोड़ देना चाहिए?

सिर्फ पितृ पक्ष के डर से नौकरी छोड़ने का फैसला न करें. पहले यह समझें कि परिवार की धार्मिक परंपरा क्या है और जॉइनिंग टालने का नुकसान क्या होगा. नए बिजनेस के मामले में भी जरूरी काम और उद्घाटन की तारीख पर अलग-अलग विचार किया जा सकता है.

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पितृ पक्ष में नए काम क्यों टालते हैं?

पितृ पक्ष पूर्वजों को याद करने और उनके निमित्त श्राद्ध-तर्पण का समय है. कई परिवार इन दिनों शादी, गृह प्रवेश और नए कारोबार की शुरुआत टालते हैं. धार्मिक व्यवहार में नए व्यापार का शुभारंभ बाद में करने की सलाह भी मिलती है.

लेकिन इसी बात को आगे बढ़ाकर यह कह देना कि इन दिनों नौकरी जॉइन की तो अनर्थ होगा, सही नहीं है. ऐसी निश्चित बात कहने के लिए प्रमाण चाहिए.

परंपरा का सम्मान अपनी जगह है. रोजी-रोटी का सवाल भी अपनी जगह है. फैसला लेते समय दोनों को समझना जरूरी है.

नौकरी की जॉइनिंग तय है तो क्या करें?

पहले कंपनी से पूछें कि तारीख बदल सकती है या नहीं. बिना नुकसान के बदलाव हो जाए और परिवार भी यही चाहता हो, तो कुछ दिन बाद जॉइन कर सकते हैं.

लेकिन कंपनी साफ कह दे कि इसी तारीख को आना होगा, तो नौकरी छोड़ने से पहले सोचें. घर का खर्च, फीस या दूसरी जिम्मेदारियां इसी कमाई से चलनी हैं तो उन्हें भी ध्यान में रखें.

गीता में कर्तव्य करने की बात कही गई है. उसमें जीवन निर्वाह के लिए कर्म की जरूरत भी बताई गई है. हालांकि यह पितृ पक्ष में नौकरी जॉइन करने की विशेष अनुमति वाला श्लोक नहीं है. इसे उस तरह पेश करना गलत होगा. इससे मिलने वाली सामान्य सीख यही है कि जिम्मेदारियां निभाना भी जरूरी है.

नया बिजनेस शुरू करना हो तो?

यहां अपनी स्थिति देखें. दुकान तैयार है और उद्घाटन की तारीख आपके हाथ में है. ऐसे में पारिवारिक परंपरा के अनुसार समारोह बाद में रखा जा सकता है.

दूसरी स्थिति है कि पहला ग्राहक मिल गया है. उसे अभी सामान चाहिए. काम टालने पर ऑर्डर किसी और को मिल जाएगा. तब केवल तारीख देखकर मौका छोड़ने के बजाय ग्राहक की जरूरत और अपनी तैयारी भी देखें.

जरूरी काम पहले और उद्घाटन बाद में रखना एक व्यावहारिक विकल्प है. इसे हर परिवार के लिए शास्त्रीय नियम या धार्मिक छूट न समझें. संदेह हो तो कुलपुरोहित से साफ पूछें, आपकी परंपरा में रोक उद्घाटन पर है या काम शुरू करने पर भी?

जॉइनिंग के दिन ही घर में श्राद्ध हो तो?

अगर श्राद्ध की जिम्मेदारी आपकी है तो पहले से व्यवस्था करें. कंपनी से समय मांगें. विधि और उसके समय को लेकर पुरोहित से बात करें. अपनी सुविधा के लिए श्राद्ध की तिथि बदल देना समाधान नहीं है.

नौकरी जॉइन करने भर से पितर नाराज होंगे या कारोबार जरूर डूबेगा, ऐसा डर फैलाना ठीक नहीं. धार्मिक परंपरा निभाएं. साथ ही अवसर की शर्तें, अपनी जरूरत और जिम्मेदारियां देखें. मौका छोड़ने का फैसला जानकारी से लें, आशंका से नहीं.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.