Hariyali Teej 2026: सावन मास में आने वाली हरियाली तीज का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इस साल हरियाली तीज 16 अगस्त 2026, रविवार को मनाई जाएगी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने तथा व्रत रखने से अखंड सौभाग्य, दांपत्य सुख और परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

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मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया. तभी से हरियाली तीज का व्रत श्रद्धा और विश्वास के साथ किया जाता है.

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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत और पूजा के दौरान कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए. ऐसा माना जाता है कि इन नियमों की अनदेखी करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता. आइए जानते हैं वे 5 बातें, जिनसे बचने की सलाह दी जाती है.

पूजा में भूलकर भी न रखें अधूरी सामग्री

हरियाली तीज की पूजा में माता पार्वती और भगवान शिव को सुहाग की सामग्री, बेलपत्र, अक्षत, फूल, धूप, दीप, फल और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा शुरू करने से पहले सभी आवश्यक सामग्री एकत्र कर लेना शुभ माना जाता है. पूजा के बीच बार-बार उठना उचित नहीं माना जाता.

व्रत के दौरान क्रोध और कटु वचन से बचें

धार्मिक ग्रंथों में व्रत का अर्थ केवल भोजन का त्याग नहीं, बल्कि मन, वाणी और व्यवहार में भी संयम रखना बताया गया है. इसलिए इस दिन क्रोध करना, विवाद करना या किसी का अपमान करने से बचने की सलाह दी जाती है. माना जाता है कि शांत मन से की गई पूजा अधिक फलदायी होती है.

माता पार्वती और भगवान शिव की संयुक्त पूजा करें

हरियाली तीज पर केवल माता पार्वती ही नहीं, बल्कि भगवान शिव की भी पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि शिव-पार्वती की संयुक्त आराधना से दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास और सौहार्द बना रहता है. इसलिए पूजा में दोनों का स्मरण करना शुभ माना जाता है.

व्रत का संकल्प लेकर बीच में न छोड़ें

यदि आपने श्रद्धा के साथ व्रत का संकल्प लिया है, तो यथासंभव उसे विधि-विधान से पूरा करने का प्रयास करें. यदि स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या हो, तो अपनी क्षमता और पारिवारिक परंपरा के अनुसार व्रत करें. धर्मशास्त्रों में स्वास्थ्य को भी महत्वपूर्ण माना गया है.

पूजा के बाद कथा और आरती करना न भूलें

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हरियाली तीज की पूजा कथा और आरती के बिना अधूरी मानी जाती है. पूजा के बाद हरियाली तीज व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें और माता पार्वती व भगवान शिव की आरती करें. इसके बाद परिवार की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना करें.

हरियाली तीज का धार्मिक महत्व

हरियाली तीज केवल व्रत का पर्व नहीं, बल्कि श्रद्धा, प्रेम और समर्पण का प्रतीक भी है. इस दिन महिलाएं हरे वस्त्र धारण करती हैं, मेहंदी लगाती हैं, झूला झूलती हैं और माता पार्वती की पूजा करती हैं. कई स्थानों पर तीज के लोकगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा से वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है.

भविष्यवक्ता एवं कुंडली विश्लेषक डा. अनीष व्यास के अनुसार, हरियाली तीज का पर्व शिव और शक्ति के दिव्य मिलन का प्रतीक है. इस दिन श्रद्धा, सात्विकता और नियमों का पालन करते हुए पूजा करने से मन को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है. हालांकि, पूजा का सबसे महत्वपूर्ण आधार सच्ची आस्था और अच्छे कर्म माने गए हैं.

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