Kamika Ekadashi 2026:सनातन धर्म में एकादशी तिथि भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाती है. सावन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी कहा जाता है. साल 2026 में कामिका एकादशी 9 अगस्त, रविवार को मनाई जाएगी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की श्रद्धापूर्वक पूजा, व्रत और दान-पुण्य करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है.

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पद्म पुराण सहित कई धार्मिक ग्रंथों में कामिका एकादशी के महत्व का उल्लेख मिलता है. मान्यता है कि इस दिन किए गए सत्कर्म व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं.

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आइए जानते हैं कि कामिका एकादशी पर कौन-से 7 कार्य शुभ माने जाते हैं.

भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें

कामिका एकादशी के दिन सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं. पीले फूल, तुलसी दल, फल और पंचामृत अर्पित करें. धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा भगवान विष्णु को प्रिय होती है.

तुलसी दल अवश्य अर्पित करें

वैष्णव परंपरा में तुलसी को भगवान विष्णु का अत्यंत प्रिय माना गया है. मान्यता है कि तुलसी दल के बिना भगवान विष्णु की पूजा अधूरी मानी जाती है. इसलिए इस दिन श्रद्धा के साथ तुलसी अर्पित करना शुभ माना जाता है.

विष्णु मंत्रों का जाप करें

कामिका एकादशी पर 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या 'ॐ नमो नारायणाय' मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंत्र जाप से मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है.

व्रत का पालन करें

श्रद्धालु अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार एकादशी व्रत रख सकते हैं. कई लोग निर्जला, फलाहार या सात्विक भोजन के साथ व्रत करते हैं. यदि किसी व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो, तो वह चिकित्सकीय सलाह और अपनी क्षमता के अनुसार व्रत कर सकता है.

दान-पुण्य करें

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कामिका एकादशी पर अन्न, वस्त्र, फल, जल या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना पुण्यदायी माना जाता है. दान हमेशा निस्वार्थ भाव और योग्य व्यक्ति को ही करना चाहिए.

धार्मिक ग्रंथों का पाठ और सत्संग करें

इस दिन विष्णु सहस्रनाम, भगवद्गीता, श्रीमद्भागवत या अन्य धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना शुभ माना जाता है. यदि संभव हो तो सत्संग में शामिल होकर भगवान के नाम का स्मरण करें.

क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहें

एकादशी केवल भोजन का व्रत नहीं, बल्कि मन और वाणी के संयम का भी पर्व है. इसलिए इस दिन क्रोध, कटु वचन, झूठ, चुगली और नकारात्मक सोच से बचने की सलाह दी जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सात्विक आचरण से व्रत का महत्व बढ़ जाता है.

कामिका एकादशी का धार्मिक महत्व

धर्मग्रंथों में कामिका एकादशी को पापों से मुक्ति, मन की शुद्धि और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने वाली एकादशियों में विशेष स्थान दिया गया है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है.

हालांकि, धार्मिक विद्वानों का मानना है कि केवल व्रत रखने से अधिक महत्वपूर्ण है सच्ची श्रद्धा, सदाचार और अच्छे कर्म.

पंडित सुरेश श्रीमाली के अनुसार, कामिका एकादशी भगवान विष्णु की भक्ति और आत्मसंयम का पर्व है. इस दिन व्यक्ति को पूजा-पाठ के साथ अपने व्यवहार, विचार और कर्मों को भी सकारात्मक बनाने का प्रयास करना चाहिए. भगवान की कृपा प्राप्त करने का सबसे श्रेष्ठ मार्ग सच्ची भक्ति, सेवा और सदाचार है.

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