कई बार हम रोजमर्रा की भागदौड़ में अपने शरीर के छोटे-छोटे संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं. दिनभर खड़े रहने, ज्यादा चलने या लंबे समय तक बैठे रहने के बाद पैरों में हल्की सूजन आना आम बात लगती है. अक्सर लोग सोचते हैं कि थोड़ा आराम करेंगे तो ठीक हो जाएगा, और सच में कई मामलों में सूजन अपने-आप उतर भी जाती है.
लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब पैरों या टांगों की सूजन बार-बार होने लगे, बिना किसी खास वजह के आने लगे या सूजे हुए पैर पत्थर जैसे सख्त महसूस होने लगें. ऐसे में यह सिर्फ थकान नहीं, बल्कि शरीर के अंदर चल रही किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है. ऐसे में आइए जानतेे हैं कि पैरों और टांगों में सूजन क्यों आती है, इसके पीछे कौन-कौन सी बीमारियां हो सकती हैं, यह कब खतरनाक बन जाती है, और ऐसे में आपको क्या करना चाहिए.
पैरों और टांगों में सूजन क्या होती है?
पैरों और टांगों में सूजन को मेडिकल भाषा में एडिमा (Edema) कहा जाता है. यह तब होती है जब शरीर के निचले हिस्सों में जरूरत से ज्यादा पानी या तरल पदार्थ जमा हो जाता है. कभी-कभी यह सूजन हल्की होती है और आराम करने से ठीक हो जाती है. लेकिन अगर सूजन लंबे समय तक बनी रहे, रोज-रोज आए या दर्द और सख्ती के साथ हो, तो यह चिंता का विषय है.
अगर पैर सूजकर पत्थर जैसे हो जाएं तो हो गई है ये बीमारी
अगर आपके पैर बहुत ज़्यादा सख्त हो जाएं दबाने पर गड्ढा न बने, दर्द, लालिमा या गर्मी हो तो यह पेरिफेरल एडिमा या किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है. ऐसे लक्षण दिल, किडनी, लीवर या खून के थक्के से जुड़ी समस्या की ओर इशारा करते हैं.
पैरों में सूजन के आम कारण
1. लाइफस्टाइल से जुड़े कारण - लंबे समय तक खड़े या बैठे रहना, टाइट जूते या मोजे पहनना, ज्यादा नमक वाला खाना, फिजिकल , एक्टिविटी की कमी इन वजहों से खून का बहाव ठीक से नहीं हो पाता और पैरों में पानी जमा होने लगता है.
2. प्रेगनेंसी - प्रेगनेंसी में पैरों में सूजन आम है. लेकिन अगर सूजन के साथ तेज सिरदर्द, हाई ब्लड प्रेशर, आंखों के सामने झिलमिलाहट हो, तो यह प्री-एक्लेमप्सिया जैसी गंभीर स्थिति हो सकती है.
3. चोट या मोच - पैर में मोच, हड्डी टूटना, मांसपेशियों में खिंचाव इन मामलों में सूजन के साथ दर्द भी रहता है और आमतौर पर एक ही पैर प्रभावित होता है.
इसके पीछे कौन-कौन सी बीमारियां हो सकती हैं
1. दिल की बीमारी (Heart Failure) - जब दिल ठीक से खून पंप नहीं कर पाता, तो खून और तरल पदार्थ पैरों में जमा होने लगता है. दोनों पैरों में सूजन, शाम के समय सूजन बढ़ जाना और सांस फूलना जैसी समस्या हो सकती है.
2. किडनी की बीमारी - किडनी शरीर से अतिरिक्त पानी बाहर निकालती है. अगर किडनी ठीक से काम न करे तो पैरों में, टखनों में, चेहरे पर भी सूजन आ सकती है.
3. लीवर की बीमारी - लीवर सिरोसिस जैसी बीमारी में टांगों में, पैरों में और पेट में पानी भर सकता है. पैर सूजकर पत्थर जैसे हो सकते हैं.
4. डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) - यह एक बेहद खतरनाक स्थिति है. आमतौर पर सिर्फ एक पैर में अचानक सूजन, दर्द, लालिमा, गर्माहट अगर खून का थक्का फेफड़ों तक पहुंच जाए, तो जान को खतरा हो सकता है.
5. वैरिकोज वेन्स - पैरों की नसें कमजोर हो जाने से नसें उभर आती हैं, भारीपन और लंबे समय तक रहने वाली सूजन होती है. 6. लिम्फेडेमा - जब शरीर की लसीका प्रणाली सही से काम नहीं करती, तो सूजन लगातार बनी रहती है, पैर सख्त और भारी लगते हैं. आराम करने से भी सूजन कम नहीं होती है.
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