आज के समय में घुटनों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही है. बढ़ती उम्र, मोटापा, चोट, गठिया और जोड़ों से जुड़ी बीमारियों की वजह से लोगों को चलने-फिरने में दिक्कत होने लगती है. शुरुआत में हल्का दर्द नजरअंदाज किया जाता है, लेकिन जब दवाइयां, तेल और एक्सरसाइज से भी राहत नहीं मिलती तो डॉक्टर घुटना ट्रांसप्लांट करने की सलाह देते हैं. हालांकि घुटना ट्रांसप्लांट कराना एक बड़ा डिसीजन होता है, इसलिए सर्जरी से पहले पूरी जानकारी होना बहुत जरूरी है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं की घुटना ट्रांसप्लांट करने में कितना खर्च आता है और ट्रांसप्लांट से जुड़ी पांच जरूरी बातें कौन सी है.
कब जरूरी हो जाता है घुटना ट्रांसप्लांट कराना?
जब घुटनों में लगातार दर्द और सूजन बनी रहे और रोजमर्रा के काम जैसे चलना, सीढ़ियां चढ़ना या उठना-बैठना मुश्किल हो जाए तो यह ट्रांसप्लांट का संकेत हो सकता है. ओस्टियोआर्थराइटिस या रूमेटाइड आर्थराइटिस में अगर दवाइयां और थेरेपी से आराम न मिले और एक्स-रे या एमआरआई में जॉइंट डैमेज दिखे, तब सर्जरी की जरूरत पड़ती है.
घुटना ट्रांसप्लांट करने में कितना आता है खर्च?
भारत में घुटना ट्रांसप्लांट का खर्च हॉस्पिटल के टाइप, सर्जरी एक घुटने की है या दोनों की और इसमें इस्तेमाल होने वाले इंप्लांट पर निर्भर करता है. वहीं घुटना ट्रांसप्लांट का खर्च सरकारी हॉस्पिटल में कम होता है, जबकि प्राइवेट और कॉरपोरेट हॉस्पिटल में यह ज्यादा हो सकता है. सरकारी हॉस्पिटल में एक घुटने के ट्रांसप्लांट का खर्च करीब 60 हजार से 1 लाख रुपये तक हो सकता है. वहीं दोनों घुटने के लिए यह खर्च करीब 1.2 लाख से 2 लाख रुपये तक हो सकता है. इसके अलावा मिड रेंज प्राइवेट हॉस्पिटल में एक घुटने की सर्जरी पर 1.5 लाख से 2.5 लाख रुपये तक और दोनों घुटनों की सर्जरी पर 3 से 5 लाख रुपये तक का खर्चा हो सकता है. वहीं हाई एंड कॉरपोरेट हॉस्पिटल में एक घुटने के ट्रांसप्लांट पर 3 से 5 लाख रुपये और दोनों घुटने का खर्च 6 से 10 लाख रुपये तक पहुंच सकता है.
घुटना ट्रांसप्लांट से पहले यह पांच बातें जानना जरूरी
- एक्सपर्ट्स बताते हैं की सर्जरी से पहले सही ऑर्थोपेडिक डॉक्टर और भरोसेमंद हॉस्पिटल का चुनाव सबसे अहम होता है.
- इसके बाद एक्सपीरियंस्ड सर्जन से एडवाइज लें और जरूरी जांच जैसे ब्लड टेस्ट, एक्स-रे और एमआरआई जरूर कराएं.
- सर्जरी के परिणामों के बारे में रियलिस्टिक उम्मीदें रखनी चाहिए. वहीं ध्यान रखें घुटना ट्रांसप्लांट दर्द कम करता है और चलने में सुधार आता है, लेकिन पुराने घुटने जैसी पूरी क्षमता हर हाल में नहीं मिलती है.
- वहीं ऑपरेशन के बाद फिजियोथैरेपी और रिकवरी प्लान का सही से पालन करना जरूरी होता है.
- साथ ही अपनी दवाइयां और किसी भी तरह की एलर्जी की जानकारी डॉक्टर को पहले ही देनी चाहिए.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.