Survival After Being Shot:सिनेमा हो या खबरें, जब भी गोली चलने का जिक्र होता है, तो हमारे दिमाग में तेज आवाज, खून और अचानक हुई मौतकीतस्वीरें उभर आती हैं. फिल्मों में तो अक्सर गोली लगते ही इंसान जमीन परगिरकरतुरंत दम तोड़ देता है, लेकिन हकीकत इससे थोड़ी अलग होतीहै. असलजीवनमेंगोलीलगनाएकगंभीरमेडिकलइमरजेंसीहैऔरमौतकासमयइसबातपरनिर्भरकरताहैकिगोलीशरीरकेकिसहिस्सेमेंलगी, कितनीगहराईतकगई, कितनीब्लीडिंगहुईऔरपीड़ितकोकितनीजल्दीमेडिकलसहायतामिली.

डॉ. राजेशमिश्राबतातेहैंकि, हरगोलीजानलेवानहींहोती, लेकिनसहीसमयपरइलाजमिलनेपरमामूलीघावभीजानलेसकताहै. कुछमामलोंमेंमौतकुछहीमिनटोंमेंहोजातीहै, जबकिकुछलोगघंटोंतकजीवितरहसकतेहैं.

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गोली लगने के बाद मौत का समय किन बातों पर निर्भर करता है?

शरीर के कौनसे अंग में गोली लगी है

  • सिर, हृदय या गर्दन में गोली लगना सबसे खतरनाक माना जाता है. यहां चोट लगते ही इंसान कुछ ही मिनटों या सेकंड में दम तोड़ सकता है.
  • छाती या पेट में गोली लगने पर आंतरिक अंगों को नुकसान पहुंचता है और खून बहने से मौत हो सकती है, लेकिन अगर समय पर इलाज मिल जाए तो बचाव संभव है.
  • हाथ या पैर में गोली लगने पर तुरंत मौत की संभावना बहुत कम होती है.

ब्लीडिं की मात्रा का निर्भर करता है

यदि गोली से कोई बड़ी नस पर लगी है तो शरीर से बहुत तेजी से खून बहता है और मौत 5मिनट में हो सकती है. लेकिन ब्लीडिंगकंट्रोल में हो, तो व्यक्ति कई घंटों तक भी जीवित रह सकता है.

मेडिकल सहायता कितनी जल्दी मिली

गोली लगने के तुरंत बादखून रोकने की प्रक्रिया और हॉस्पिटल में ट्रॉमाकेयर मिलने से कई जानें बचाई जा सकती हैं. 

गोली की ताकत और दूरी

नजदीक से चली गोली का प्रभाव ज्यादा घातक होता है. जबकि दूर से लगी गोली शरीर को छेद सकती है, पर उतनी गहराई तक असर नहीं कर सकती.

गोली लगने के बाद इंसान की मौत का समय निश्चित नहीं होता, यह पूरी तरह से परिस्थितियों पर निर्भर करता है. फिल्मों में दिखाई जाने वाली तात्कालिक मृत्यु अक्सरसही नहीं होती. वास्तविकता में सही समय पर इलाज और सतर्कता से कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.