Types Of Rest: सप्ताह भर ऑफिस और घर में भरपूर काम करने के बाद मन होता है वीकएंड पर रिलेक्स करने का. कुछ लोग काम से ब्रेक लेकर वेकेशन पर भी जाते हैं. उसके बावजूद काम पर लौटते हुए वही स्ट्रेस और बोझ महसूस होता है. आपका भी अनुभव कुछ ऐसा ही है तो आपको रेस्ट करने का तरीका बदलने की जरूरत है. संभव है कि आपको सामान्य किस्म के रेस्ट की जगह थोड़ा स्पेसिफिक रेस्ट चाहिए. आपको जानकर ताज्जुब होगा कि रेस्ट के भी अलग अलग प्रकार होते हैं. इन्हें ट्राई करिए और देखिए कि कौन सा रेस्ट आपको वाकई आराम पहुंचाता है.

 

स्पिरिच्यूअल रेस्ट

छुट्टियों का समय हो सकता है आप मोबाइल और टीवी देखते हुए बिता दें. इससे फिजिकल रेस्ट तो मिल सकता है लेकिन दिमागी सुकून नहीं मिलता और थकावट का अहसास होता रहता है. इससे बेहतर है कि ऑफिस जाने से पहले खुद को स्पिरिच्यूअल रेस्ट दें. कुछ देर शांति से आंख बंद कर गुजरे हुए अच्छे पलों को याद करें. कुछ देर भजन या कथा सुनें. ऐसा करने से दिमाग को काफी राहत मिलेगी.

 

सेंसॉरी रेस्ट

मोबाइल पर पूरे समय आ रहे नोटिफिकेशन्स, मैसेज, मेल्स, अलर्ट्स- न चाहते हुए भी दिमाग को शांत नहीं होने देते. स्क्रीन पर ये सारी चीजें देखकर न चाहते हुए भी सेंसॉरी नर्वज एक्टिव ही रहती हैं. इस किस्म के रेस्ट के लिए खुद को डिजिटली डिटॉक्स करें. नेट ऑफ कर स्क्रीन को खुद से दूर करें और आराम फरमाएं.

 

क्रिएटिव रेस्ट

आपको जिस भी तरह का काम करना पसंद है. जिसे हॉबी कहा जाता है. उस हॉबी के साथ कुछ वक्त बिताएं. डांस, पेंटिंग, कुकिंग, गार्डनिंग- जो भी आपका मन करे, उस काम में डूब जाएं. इस तरह आपको जेहनी राहत मिलेगी.

 

इमोशनल रेस्ट

इस तरह के रेस्ट में आपको फैमिली के साथ समय बिताना है. लेकिन उन बातों को अवॉइड करना है जो आपको या किसी फैमिली मैंबर को ट्रिगर करती हों. परिवार वालों के साथ बीते शांती भरे लम्हे खूब सुकून देने वाले होते हैं.

 

सोशल रेस्ट

खुद को सोशली रेस्ट देना भी जरूरी है. एक दिन ऐसा जरूर निकालिए जब आप सबसे कट कर सिर्फ खुद को समय दें और अपने अनुसार वक्त बिताएं. बस इतना समय काफी है एक बार अपने अपनों का नई एनर्जी के साथ, साथ देने के लिए.