Luxury Bag Dinosaur Collagen: वैज्ञानिकों और डिजाइनरों ने हाल ही में एक ऐसा अनोखा बैग पेश किया है, जो Tyrannosaurus rex (टी.रेक्स) के फोसिल से प्राप्त प्रोटीन से तैयार किए गए लेदर से बनाया गया है. यह बैग टील कलर का है और फिलहाल यह एम्सटर्डम के आर्ट जू म्यूजियम में प्रदर्शित किया जा रहा है. बैग को एक चट्टान पर रखा गया है और उसके ऊपर टी.रेक्स की रिप्लिकेशन भी है. यह प्रदर्शनी 11 मई तक चलेगी.  इसके बाद यह बैग नीलामी में जाएगा, और इसकी शुरुआती कीमत आधा मिलियन डॉलर से ज्यादा बताई जा रही है. 

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बैग कैसे बनाया गया?

टीम के अनुसार, इस बैग में इस्तेमाल होने वाला लेदर सीधे डायनासोर से नहीं बल्कि प्राचीन प्रोटीन के अंशों (fragmented collagen) से विकसित किया गया. इस लिए सबसे पहले टी.रेक्स के जीवाश्म से प्रोटीन के छोटे टुकड़े निकाले गए. इसके बाद इन टुकड़ों को किसी अनजान जानवर की सेल्स में डालकर नया कोलेजन तैयार किया गया. लास्ट में इस कोलेजन को प्रोसेस करके लेदर में बदला गया. इस प्रक्रिया में कई तकनीकी चुनौतियां आईं, लेकिन टीम का कहना है कि उन्होंने इसे संभव बनाया. 

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इस प्रोजेक्ट को किस ने तैयार किया?

यह प्रोजेक्ट तीन कंपनियों के सहयोग से तैयार हुआ है. जिसमें पहला The Organoid Company  जीनोमिक इंजीनियरिंग कंपनी, VML  क्रिएटिव एजेंसी औरप Lab Grown Leather Ltd. लैब में विकसित चमड़े की कंपनी शामिल है. कंपनियों ने पहले भी 2023 में एक विशाल मीटबॉल बनाया था, जिसमें ऊन वाले मैमथ (woolly mammoth) के DNA को भेड़ की कोशिकाओं के साथ मिलाया गया था. 

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क्यों है यह बैग खास?

Lab Grown Leather Ltd. के CEO चे कॉनॉन कहते हैं कि टी.रेक्स का कनेक्शन इसे एक अलग पहचान और लक्जरी टच देता है. VML के ग्लोबल चीफ क्रिएटिव ऑफिसर बस कॉर्स्टन कहते हैं कि यह दिखाने का तरीका है कि एथिकल और लैब में बने पदार्थ भी पारंपरिक चमड़े जितने या उससे ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं. 

इस प्रोजेक्ट को लेकर वैज्ञानिक क्या कहते हैं

इस प्रोजेक्ट को लेकर कई वैज्ञानिक डाउट कर रहे हैं. मेलनी ड्यूरिंग, डच वेर्टेब्रेट पेलियंटोलॉजिस्ट, कहती हैं कि डायनासोर की हड्डियों में पाए जाने वाला कोलेजन सिर्फ छोटे टुकड़ों में बचा होता है, जिससे वास्तविक चमड़े जैसा बनाना लगभग असंभव है. थॉमस आर. होल्ट्ज जूनियर, मैरीलैंड विश्वविद्यालय के पेलियंटोलॉजिस्ट, कहते हैं कि टी.रेक्स के हड्डियों के अंदर जो कोलेजन मिलता है, वह स्किन से नहीं आता. यहां तक कि अगर प्रोटीन का मिलान सही भी हो, तब भी यह वास्तविक चमड़े की संरचना और मजबूती नहीं दे सकता है. 

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