Train Engine Grille: अगर आपने कभी ट्रेन के इंजन को करीब से देखा हो तो शायद आपने इस बात पर गौर किया होगा कि लोकोमोटिव की सामने वाली विंडशील्ड पर एक लोहे की जाली लगी होती है. काफी लोग सोचते हैं कि यह सिर्फ डिजाइन का ही एक हिस्सा है लेकिन असल में यह जाली रेलवे सुरक्षा में एक बड़ी भूमिका निभाती है. यह जाली लोको पायलट और इंजन की विंडशील्ड को पत्थरों, पक्षियों और दूसरी चीजों से बचाने के लिए लगाई जाती है. 

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उड़ते पत्थरों से सुरक्षा 

ट्रेन अक्सर 110 से 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है. इतनी तेज रफ्तार पर रेलवे ट्रैक के पास रखे पत्थर या फिर ढीली गिट्टी हवा के दबाव से ऊपर उठकर सीधे विंडशील्ड से टकरा सकते हैं. यह धातु की जाली एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है और कांच से टकराने से पहले किसी भी चीज के असर को कम कर देती है. 

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पत्थरबाजी की घटनाओं के दौरान सुरक्षा 

कई इलाकों में असामाजिक तत्व कभी-कभी रेलवे ट्रैक के किनारे से चलती ट्रेनों पर पत्थर फेंकते हैं. तेज रफ्तार में एक छोटा सा पत्थर भी जबरदस्त ताकत से टकरा सकता है और काफी खतरनाक साबित हो सकता है. अगर विंडशील्ड टूट जाती है तो पत्थर केबिन के अंदर बैठे लोको पायलट को गंभीर रूप से घायल कर सकता है. इससे रेलवे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है. यह जाली कांच पर होने वाले सीधे हमले को रोकने में काफी मदद करती है.

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नजर पर कोई असर नहीं 

लोहे की बनी होने के बावजूद भी इस जाली को काफी सावधानी से डिजाइन किया जाता है. ऐसा इसलिए ताकि यह लोको पायलट की आगे की नजर को ना रोके. जाली के बीच के खाली हिस्सों में से ड्राइवर को ट्रैक साफ-साफ दिखाई देता है. यह विंडशील्ड पर धूल, गंदगी और कीड़े मकोड़े को सीधे जमा होने से रोकने में भी मदद करती है. 

रेलवे सुरक्षा का एक जरूरी हिस्सा 

भले ही यह एक छोटी सी चीज लगती हो लेकिन इस जाली को लोकोमोटिव की सुरक्षा का एक जरूरी हिस्सा माना जाता है. यह तेज रफ्तार से चलने के दौरान ड्राइवर और इंजन दोनों की सुरक्षा करती है. इतना ही नहीं बल्कि यह ट्रेन के सफर को ज्यादा सुरक्षित बनाने में मदद करती है. रेलवे इंजीनियर इन सिस्टम को इस बात को ध्यान में रखकर डिजाइन करते हैं कि व्यस्त रेलवे रूट पर ट्रेन को हर दिन किन-किन असली खतरों का सामना करना पड़ सकता है.

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