क्या कभी ऐसा हुआ है कि आप किसी बेहद गंभीर मीटिंग में बैठे हों, बॉस किसी को डांट रहे हों या किसी गमगीन माहौल में खड़े हों, और अचानक आपको जोर से हंसी आने लगे? आप होंठ काटते हैं, सिर झुकाते हैं और हंसी रोकने की पूरी जद्दोजहद करते हैं, पर वह और बढ़ती जाती है. यह पल शर्मिंदगी से भरा होता है, लेकिन सच तो यह है कि इसमें आपकी कोई गलती नहीं है. यह आपके दिमाग का एक अनूठा रिएक्शन है, जिसे विज्ञान में ‘नर्वस लाफ्टर’ कहा जाता है.

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असंगत भावनाओं का शिकार

मनोविज्ञान की दुनिया में इसे ‘इंकॉन्ग्रस इमोशन’ या असंगत भावना के रूप में जाना जाता है. इसका सरल अर्थ है कि हमारे मन के भीतर की स्थिति और बाहर के व्यवहार के बीच कोई तालमेल नहीं है. सीरियस माहौल में आने वाली यह हंसी खुशी का इजहार नहीं है, बल्कि यह आपके शरीर का एक डिफेंस मैकेनिज्म यानी बचाव का तरीका है. जब हम किसी भारी तनाव, असहजता या डर की स्थिति में होते हैं, तो हमारा शरीर उस मानसिक दबाव को बाहर निकालने के लिए हंसी का सहारा लेता है.

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डर को दूर भगाने का जरिया

वैज्ञानिक दशकों से इस अजीब व्यवहार पर रिसर्च कर रहे हैं. न्यूरोसाइंटिस्ट्स का मानना है कि मानव विकास के दौरान हंसी एक संकेत के रूप में विकसित हुई थी. आदिमानव के समय में, जब कोई खतरा सामने होता था, तो हंसी एक सिग्नल का काम करती थी कि यहां डरने की कोई बात नहीं, सब सुरक्षित है. आज के दौर में भी, जब हम किसी तनावपूर्ण हालात में फंसते हैं, तो हमारा दिमाग उस डर या दर्द से ध्यान भटकाने के लिए खुद को एक पॉजिटिव सिग्नल देने की कोशिश करता है, जो हंसी की शक्ल में बाहर निकलता है.

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ओवरफ्लो इमोशन

गंभीर पलों में हंसी आने की एक और बड़ी वजह है भावनाओं का ओवरफ्लो होना. जिस तरह किसी बहुत प्यारे बच्चे को देखकर कभी-कभी उसे जोर से दबाने या गाल खींचने की इच्छा होती है, वैसे ही जब तनाव या चिंता दिमाग में हद से ज्यादा भर जाती है, तो ब्रेन खुद को बैलेंस करने के लिए उल्टा रिएक्शन देता है. यानी, जहां रोना या उदास होना चाहिए, वहां दिमाग तनाव को कम करने के लिए हंसी का बटन दबा देता है ताकि आप मानसिक रूप से टूट न जाएं.

क्या यह कोई मानसिक बीमारी है?

अगर आपको लगता है कि सिर्फ आपके साथ ही ऐसा होता है, तो जान लें कि आप बिल्कुल नॉर्मल हैं, ऐसा अक्सर लोगों के साथ होता है. नर्वस लाफ्टर एक आम मानवीय प्रतिक्रिया है. यह साबित करता है कि आपका दिमाग तनाव के सामने हथियार डालने के बजाय, उसे मैनेज करने की कोशिश कर रहा है. यह एक ऐसा अनचाहा मैकेनिज्म है, जिसे आप चाहकर भी तुरंत बंद नहीं कर सकते क्योंकि यह आपके चेतन मन के नहीं, बल्कि अवचेतन मस्तिष्क के नियंत्रण में होता है.

तनाव के प्रबंधन का शरीरिक तरीका

सीरियस मौकों पर हंसी आना असल में आपके नर्वस सिस्टम का एक रिस्पांस है. जब हम अत्यधिक तनाव में होते हैं, तो हमारा दिमाग उस स्थिति को बर्दाश्त से बाहर. समझने लगता है. ऐसे में फाइट या फ्लाइट मोड के बीच, हंसी एक रिलीज वॉल्व की तरह काम करती है. यह आपके शरीर को शांत करने और उस गंभीर स्थिति के बोझ को थोड़ा हल्का करने की एक कोशिश है. अगली बार जब ऐसा हो, तो खुद को शर्मिंदा महसूस करने के बजाय यह समझें कि आपका दिमाग अपनी सुरक्षा कर रहा है.

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