Naughtiest Children: क्लास में अनुशासन, शोर और छात्रों की ध्यान केंद्रित करने की क्षमता सीखने के माहौल को तय कर सकती है. प्रोग्राम फॉर इंटरनेशनल स्टूडेंट असेसमेंट की हालिया रिपोर्ट से यह पता चलता है कि अलग-अलग देशों में कक्षा के व्यवहार में काफी ज्यादा अंतर है.

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इसमें बताया गया है कि एशिया के कुछ हिस्सों में कक्षाएं काफी शांत रहती हैं जबकि कई पश्चिमी देशों में अनुशासन बनाए रखने को लेकर ज्यादा चुनौतियां हैं. यह तुलना सिर्फ सबसे शरारती बच्चों की पहचान करने के बजाय, कक्षा में होने वाले शोर, छात्रों के ध्यान और वहां के माहौल पर केंद्रित है.

एशियाई देशों में सबसे अनुशासित कक्षाएं 

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जापान, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर उन देशों में शामिल हैं जहां कक्षाएं सबसे ज्यादा अनुशासित होती हैं. इन देशों में 85% से ज्यादा छात्रों का कहना है कि पढ़ाई के दौरान कभी शोर नहीं होता. क्लास में शांत होने से शिक्षकों को अनुशासन बनाए रखने में वक्त बर्बाद करने के बजाय, पढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने का मौका मिलता है.

चीन में भी क्लास काफी अनुशासित मानी जाती है. यहां छात्र कक्षा के नियमों का सख्ती से पालन करते हैं और पढ़ाई के दौरान अपना पूरा ध्यान अपनी पढ़ाई पर ही लगाते हैं. इन उदाहरणों से पता चलता है कि कई एशियाई देशों की शिक्षा प्रणालियों काफी अनुशासित हैं.

 

ऑस्ट्रेलिया में क्लास के अंदर ज्यादा शोर 

ऑस्ट्रेलिया उन देशों में शामिल है जहां पर छात्रों का कहना है कि क्लास में पढ़ाई के दौरान काफी व्यवधान होता है. आंकड़ों के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया के 41% छात्रों का कहना है कि उनकी क्लास में लगातार शोर होता रहता है. यह आंकड़ा 31% के वैश्विक औसत से ज्यादा है जो बताता है कि ऑस्ट्रेलिया में छात्रों के बीच क्लास का शोर एक आम समस्या है. 

डिजिटल उपकरणों की वजह से ध्यान भटकना भी एक बड़ी समस्या है. ऑस्ट्रेलिया में लगभग 39% छात्रों का कहना है कि लैपटॉप या टैबलेट के इस्तेमाल से अक्सर उनका ध्यान पढ़ाई से भटक जाता है. यह आंकड़े क्लास में सीखने की प्रक्रिया के सामने दो बड़ी चुनौती पेश करते हैं, कक्षा में शांति बनाए रखना और डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल करते वक्त छात्रों का ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित रखना. 

न्यूजीलैंड और यूनाइटेड किंगडम 

न्यूजीलैंड और यूनाइटेड किंगडम में भी क्लास मैनेजमेंट को लेकर काफी चुनौती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया की तरह ही इन देशों के स्कूलों में भी अनुशासन का स्तर लगातार गिर रहा है. इस तुलना से यह पता चलता है कि यहां छात्र शिक्षकों की बात कम सुनते हैं और क्लास में ज्यादा शोर मचाते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक न्यूजीलैंड या फिर यूके के लिए कोई सटीक प्रतिशत नहीं दिया गया है. इस वजह से उनके बीच आंकड़ों के आधार पर तुलना करना मुमकिन नहीं है. 

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भारत की स्थिति क्या है? 

भारत ने प्रोग्राम फॉर इंटरनेशनल स्टूडेंट एसेसमेंट की इस नई रिपोर्ट में हिस्सा नहीं लिया है. यही वजह है कि इस नई रिपोर्ट में कक्षा के अनुशासन या फिर छात्रों के व्यवहार के मामले में भारत की वर्तमान स्थिति का पता नहीं चलता है. इन नतीजों के आधार पर दूसरे देशों के साथ भारत की रैंकिंग नहीं की जा सकती.

इस रैंकिंग में भारत ने आखिरी बार 2009 में हिस्सा लिया था. उस वक्त शैक्षणिक प्रदर्शन के मामले में भारतीय छात्र 74 देशों में 73वें स्थान पर थे. हालांकि वह पुराना परिणाम सिर्फ शैक्षणिक प्रदर्शन से जुड़ा है. इसमें कक्षा में शोर, शिक्षक की बात मानना या फिर अनुशासन के मामले में भारत की वर्तमान स्थिति का पता नहीं चलता. 

दी गई जानकारी में भारत और दूसरे दक्षिण एशियाई देशों में शिक्षकों के प्रति सम्मान की परंपरा का भी जिक्र है. गुरु-शिष्य परंपरा शिक्षकों के प्रति सम्मान और कक्षा में कड़े अनुशासन से जुड़ी है. इसी आधार पर कहा जाता है कि ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन जैसे पश्चिमी देशों की तुलना में भारतीय कक्षाओं में शोर शराबा और अनुशासनहीनता कम देखने को मिलती है.

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